BHILAI. शॉपिंग की बात आते ही आजकल दिमाग में online सामान बेचने वाली तमाम site घूमने लगती हैं। क्योंकि यहाँ discount का ऐसा मायाजाल है, जो हमें लूटता है और हमें पता भी नहीं चलता। इसके अलावा online shopping जो सबसे बड़ा नुक़्सान कर रही है, वो है सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने का। ऑनलाइन की आदत से हम न केवल बाजार से दूर हो रहे हैं, बल्कि सामाजिक रिश्तों से भी दूर होते जा रहे हैं।

आज के समय में शायद ही कोई ऐसा इंसान होगा, जिसने ऑनलाइन शॉपिंग नहीं की हो। जैसे-जैसे हमारा देश डिजिटल होता जा रहा है। वैसे-वैसे लोग अपने हर काम को डिजिटल तरीके से बैठे-बैठे करने की आदि होते जा रहे हैं। इसी का एक उदाहरण ऑनलाइन शॉपिंग है। लेकिन लोग जिस प्रकार तेजी से ऑनलाइन शॉपिंग का हिस्सा बनते जा रहे हैं, उससे सामाजिक रिश्ते पीछे छूटते जा रहे हैं।

आपसी संबंध में दूरी
पहले जब लोग स्वयं बाजार जाकर सामान खरीदते थे, तब वह अपने मनपसंद सामानों की अच्छे से जांच परख करके सामान लेते थे। इससे उनका दुकानदार से भी अच्छा संबंध बन जाता था। यही सामाजिक सम्बन्ध एक-दूसरे के सुख-दु:ख में काम भी आता था। लेकिन जब से लोगों ने ऑनलाइन खरीदारी की ओर रुख किया है, तब से दुकानदार और ग्राहक का रिश्ता ख़त्म हो रहा है। लोगों में आपसी प्रेम, मधुरता में कमी आई है।

अकेलेपन की ओर ले जा रही online shopping
रायपुर के वरिष्ठ समाजशास्त्री डॉ. प्रमोद शर्मा कहते हैं कि जब कोई व्यक्ति किसी से मिलता-जुलता है, तो उनके संबंधों में मधुरता आती है। ऑनलाइन शॉपिंग के कारण इसके अवसर समाप्त हो चुके हैं। online shopping अकेलेपन की ओर ले जाती है। किसी सामान को लेने से पहले राय लेना, उसे छूकर देखना, दुकानदार से मोलभाव भी सामाजिक जुड़ाव का एक हिस्सा है। सभी के अलग-अलग होने से आज कोई किसी की मदद नहीं करना चाहता। लोगों में यह बदलाव ऑनलाइन सक्रियता का भी नतीजा है। साथ ही इसकी वजह से रोजगार में भी कमी आना स्वाभाविक है।



































