DELHI NEWS: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके समेत तीन प्रमुख नेताओं को रिहा कर दिया गया है। अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली कैंट पुलिस स्टेशन में एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। रिहाई के साथ शर्त रखी गई है कि तीनों अगले एक साल तक ऐसी किसी गतिविधि में शामिल नहीं होंगे, जिससे शांति और कानून-व्यवस्था प्रभावित हो। इस बीच, CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने दोपहर 2 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की बात कही है।

दिल्ली एयरपोर्ट से हिरासत में लिए गए थे तीनों नेता
जानकारी के मुताबिक, अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को शनिवार को दिल्ली एयरपोर्ट पर विमान से उतरने के बाद हिरासत में लिया गया था। CJP की लीगल हेड रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उनकी पेशी की जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि तीनों नेताओं को दिल्ली कैंट पुलिस स्टेशन में एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा और उनकी ओर से वकील भी वहां मौजूद रहेंगे।

अब तीनों की रिहाई हो गई है। रिहाई की शर्त के मुताबिक, उन्हें अगले एक साल तक ऐसी गतिविधियों से दूर रहना होगा, जिनसे शांति और अमन-चैन भंग होने की आशंका हो।
प्रदर्शन रोकने के लिए पुलिस की कार्रवाई, 1000 से ज्यादा लोग हिरासत में
शनिवार को दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन का आह्वान किया गया था। यह प्रदर्शन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित गड़बड़ियों के आरोपों को लेकर बुलाया गया था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक हजार से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया था। हिरासत में लिए गए लोगों में विपक्षी नेता, CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके और यूट्यूबर ध्रुव राठी समेत कई लोग शामिल बताए गए।
प्रदर्शन और पुलिस की कार्रवाई के बाद दिल्ली में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। प्रदर्शनकारियों की हिरासत और सार्वजनिक परिवहन पर लगाई गई पाबंदियों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट में पुलिस कार्रवाई को लेकर सुनवाई
दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और सार्वजनिक परिवहन पर लगी पाबंदियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दो याचिकाएं दाखिल की गई हैं। इन पर विशेष सुनवाई प्रस्तावित है। एक याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक परिवहन को पूरी तरह बाधित नहीं करने से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन हुआ। इसमें अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की मांग की गई है।

दूसरी याचिका विपक्षी नेताओं, वकीलों और पत्रकारों की हिरासत को चुनौती देती है। इसमें बंदी प्रत्यक्षीकरण यानी Habeas Corpus के तहत हिरासत में लिए गए लोगों को अदालत के सामने पेश करने और उनकी रिहाई की मांग की गई है।
हिरासत और मेट्रो पाबंदियों पर उठे सवाल
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद दिल्ली में कुछ मेट्रो स्टेशन बंद रखे गए और ट्रेन सेवाओं पर पाबंदियां जारी रहीं। वहीं, हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई और पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी कानूनी सवाल उठाए गए हैं। अदालत में सुनवाई के दौरान इन आरोपों और संबंधित पक्षों की दलीलों पर विचार किया जाएगा।




































