RAIPUR NEWS. रायपुर के खमतराई क्षेत्र के बजरंग नगर में रहने वाले 64 वर्षीय किराना कारोबारी और उनकी पत्नी को साइबर ठगों ने 44 दिन तक कथित डिजिटल अरेस्ट के नाम पर अपने जाल में फंसाए रखा। ठगों ने कारोबारी को 6.80 करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग में फंसने का डर दिखाया और खुद को CBI अधिकारी और IPS अधिकारी बताकर कार्रवाई से बचाने के नाम पर रकम जमा कराई। डर के कारण कारोबारी ने अपनी जमा पूंजी के साथ पत्नी के सोने के जेवर बेचकर कुल 8.50 लाख रुपए अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए।

ठगी का पता तब चला, जब लगातार पैसों की मांग से परेशान देवसिंह साहू ने 3 अक्टूबर को अपने छोटे भाई सुंदर साहू को पूरी घटना बताई। इसके बाद उन्हें साइबर ठगी का अहसास हुआ। 4 अक्टूबर को उन्होंने खमतराई थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस बैंक खातों और मोबाइल नंबरों के आधार पर आरोपियों की जांच कर रही है।देवसिंह के मुताबिक 18 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे उनके मोबाइल पर एक महिला का फोन आया। उसने मनी लॉन्ड्रिंग केस का हवाला देते हुए आदित्य नाम के व्यक्ति से बात कराई। आदित्य ने उनसे परिवार, जमीन और बैंक खातों समेत कई जानकारियां पूछीं।

इसके बाद बलराज सिंह नाम के व्यक्ति ने खुद को CBI अधिकारी बताया और उनसे पूछताछ की। कुछ समय बाद वीडियो कॉल के जरिए प्रदीप सिंह से बात कराई गई। उसने खुद को IPS अधिकारी बताया। फर्जी अधिकारी ने देवसिंह को बताया कि उनका नाम 6.80 करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में सामने आया है। ठगों ने दावा किया कि रकम का मिलान करने के लिए उन्हें कुछ पैसे जमा करने होंगे। ऐसा नहीं करने पर CBI की कार्रवाई और परिवार के सदस्यों को उठाकर ले जाने की धमकी दी गई।

डर का माहौल बनाने के लिए ठग लगातार वीडियो कॉल पर जुड़े रहने के लिए कहते थे। देवसिंह और उनकी पत्नी इंदु साहू को वीडियो कॉल पर उनके सामने बैठे रहने के निर्देश दिए जाते थे। हर घंटे उन्हें अपडेट देने के लिए भी कहा जाता था। 4 सितंबर से 1 अक्टूबर के बीच देवसिंह ने फोन-पे के जरिए अलग-अलग बैंक खातों में कुल 9 बार रकम जमा की। इनमें रिद्धिमा ऑटो और राकेश ट्रेडर्स के खातों में 2-2 लाख रुपए भी शामिल हैं। इस तरह ठगों ने उनसे कुल 8.50 लाख रुपए वसूल लिए।

ठग इसके बाद भी लगातार पैसों की मांग करते रहे। इससे परेशान होकर देवसिंह ने आखिरकार अपने छोटे भाई को पूरी बात बताई। परिवार को जानकारी मिलने के बाद उन्हें समझ आया कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं। देवसिंह ने खमतराई पुलिस को शिकायत के साथ बैंक स्टेटमेंट, चैट, मैसेज और पैसों के ट्रांजेक्शन की रसीदें भी उपलब्ध कराई हैं। पुलिस संबंधित बैंक खातों और आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों की जानकारी जुटा रही है।





































