PRAYAGRAJ NEWS. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शादी के वादे पर बने संबंधों से जुड़े रेप केस में यूपी पुलिस के एक इंस्पेक्टर को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने साफ किया कि शादी का वादा करके बनाए गए हर संबंध को अपने आप दुष्कर्म नहीं माना जा सकता। इसके लिए यह साबित करना जरूरी है कि आरोपी ने वादा करते समय ही शादी करने का इरादा नहीं रखा था और महिला की सहमति केवल उसी झूठे वादे के आधार पर बनी थी।

न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह की पीठ ने पुलिस इंस्पेक्टर अमित कुमार के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही और आरोप पत्र को रद्द कर दिया। कोर्ट ने मामले के उपलब्ध तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए कहा कि इस मामले में आपराधिक दायित्व बनता नजर नहीं आता और कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।

2020 में युवती ने लगाए थे गंभीर आरोप
मामला मथुरा की एक युवती की शिकायत से जुड़ा है। शिकायत के मुताबिक, 2013 में कोसीकलां में तैनाती के दौरान इंस्पेक्टर ने उससे शादी का प्रस्ताव रखा था। युवती ने आरोप लगाया था कि इंस्पेक्टर ने अपनी पहली शादी की बात छिपाई और 2019 में वाराणसी के एक होटल में नशीला पदार्थ देकर उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके अलावा अश्लील फोटो-वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने और गर्भपात कराने के भी आरोप लगाए गए थे।

कोर्ट ने किन तथ्यों पर दिया जोर?
हाईकोर्ट ने मामले की परिस्थितियों पर गौर करते हुए पाया कि महिला शिक्षित और वयस्क थी तथा आरोपी को लंबे समय से जानती थी। वह खुद वाराणसी गई थी और घटना के बाद भी आरोपी के संपर्क में रही। वह आरोपी के घर भी गई थी। कोर्ट ने यह भी देखा कि व्हाट्सएप चैट से महिला को आरोपी की पहली शादी की जानकारी होने के संकेत मिलते हैं।

कोर्ट के सामने कथित ब्लैकमेल से जुड़े फोटो या वीडियो भी पेश नहीं किए गए। इसके अलावा अदालत ने यह तथ्य भी ध्यान में रखा कि आरोपी ने शादी से इनकार नहीं किया था और बाद में उसने अपनी पहली पत्नी से तलाक ले लिया।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
अदालत ने माना कि केवल शादी का वादा होने और उसके बाद संबंध बनने से हर मामले में दुष्कर्म का अपराध नहीं बनता। ऐसे मामलों में यह देखना जरूरी है कि क्या शादी का वादा शुरुआत से ही झूठा था और क्या महिला की सहमति उसी कथित झूठे वादे के कारण बनी थी ।




































