RAIPUR NEWS. एयरलाइन के भरोसे सामान छोड़ना एक यात्री को इतना भारी पड़ा कि उसे इंसाफ के लिए करीब 10 साल इंतजार करना पड़ा। दिल्ली एयरपोर्ट पर इंडिगो के कर्मचारियों के कहने पर छोड़े गए तीन बैग रायपुर पहुंचने के बाद गायब हो गए। एयरलाइन ने मुआवजा देने से इनकार किया तो मामला उपभोक्ता आयोग पहुंचा। अब जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, रायपुर ने इंडिगो को ₹1.82 लाख की क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है। मामला समता कॉलोनी निवासी आशुतोष जाखोदिया का है। दिसंबर 2015 में आगरा में शादी समारोह में शामिल होने के बाद वह दिल्ली से रायपुर लौट रहे थे। दिल्ली एयरपोर्ट पर इंडिगो के कर्मचारियों ने आशुतोष से कहा कि समय कम है और सप्ताहांत में भीड़ ज्यादा है, इसलिए तीन बैग साथ ले जाने के बजाय एयरपोर्ट पर छोड़ दें। उन्हें भरोसा दिया गया कि सामान अगले दिन रायपुर पहुंचा दिया जाएगा।

यात्री ने एयरलाइन की बात मान ली। लेकिन रायपुर पहुंचने के बाद जब लगेज बेल्ट पर सामान लेने पहुंचे तो काला, चेकदार और नीला—तीनों बैग नदारद थे। पहले एयरलाइन कर्मचारियों ने बताया कि बैग फ्लाइट में लोड हैं और बेल्ट पर मिल जाएंगे। इंतजार के बाद भी सामान नहीं मिला। यात्री को स्लिप क्रमांक 632881 और 632804 दिए गए। काफी पूछताछ और इंतजार के बाद 18 दिसंबर 2015 को इंडिगो ने आखिरकार सामान गुम होने की पुष्टि कर दी। आशुतोष ने मुआवजे की मांग की, लेकिन 7 जनवरी 2016 को एयरलाइन ने दावा खारिज कर दिया। इंडिगो ने अपनी कंडीशन ऑफ कैरिज का हवाला देते हुए कहा कि शिकायत के समय सभी सह-यात्रियों की मौजूदगी जरूरी थी। साथ ही PIR दर्ज नहीं कराने और चेक-इन के दौरान कीमती सामान की घोषणा नहीं करने का तर्क भी दिया गया।

करीब एक दशक बाद मामले की सुनवाई करते हुए आयोग की अध्यक्ष ढाकेश्वर प्रसाद शर्मा और सदस्य निरूपमा प्रधान व अनिल कुमार अग्निहोत्री की खंडपीठ ने इंडिगो के तर्कों को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने कहा कि इस मामले में यात्री ने अपनी मर्जी से बैग नहीं छोड़े थे, बल्कि एयरलाइन कर्मचारियों के आग्रह पर सामान एयरपोर्ट पर रखा था। उसे यह भरोसा भी दिया गया था कि बैग अगले दिन रायपुर पहुंच जाएंगे। ऐसे में यात्री को तुरंत यह पता ही नहीं था कि उसका सामान गुम हो चुका है। इसलिए सभी सह-यात्रियों की मौजूदगी और PIR से जुड़े एयरलाइन के तर्क को आयोग ने इस मामले में निर्णायक नहीं माना।

आयोग ने इंडिगो के उस ईमेल को भी अहम माना, जिसमें एयरलाइन ने सामान गुम होने पर खेद जताया था। आशुतोष ने तीनों बैग में रखे सामान की कीमत करीब ₹3.20 लाख बताई थी। हालांकि, इतनी राशि के मूल्य का पर्याप्त प्रमाण आयोग के सामने नहीं आ सका। इसलिए आयोग ने प्रत्येक बैग की कीमत ₹50 हजार मानते हुए तीनों बैग के लिए कुल ₹1.50 लाख क्षतिपूर्ति तय की। इसके अलावा मानसिक परेशानी के लिए ₹25 हजार और मुकदमे के खर्च व अधिवक्ता शुल्क के लिए ₹7 हजार देने का आदेश दिया गया।

45 दिन में भुगतान, ब्याज भी देना होगा
20 अगस्त 2026 को जारी आदेश के मुताबिक इंडिगो को 45 दिनों के भीतर भुगतान करना होगा। ₹1.50 लाख की क्षतिपूर्ति पर 29 अप्रैल 2016 को परिवाद पेश किए जाने की तारीख से भुगतान तक 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देना होगा। यानी करीब 10 साल पुराने इस मामले में यात्री के तीन बैग तो वापस नहीं आए, लेकिन इंडिगो को अब ₹1.82 लाख की क्षतिपूर्ति और निर्धारित ब्याज चुकाना होगा। परिवादी की ओर से अधिवक्ता अनिकेत लहरी और अपूर्व गोयल ने पैरवी की।

































