KATHMANDU NEWS. नेपाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन की त्रासदी के बीच प्रधानमंत्री बालेन शाह ने पड़ोसी देशों से मिली मदद के लिए भारत और चीन का आभार जताया है। बुधवार को नेपाली संसद को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इस विकराल आपदा के पहले दिन से ही अंतरराष्ट्रीय सहयोग लिया जा रहा है और संकट की इस घड़ी में पड़ोसी देशों ने नेपाल का साथ दिया। भारत ने राहत एवं बचाव कार्यों में सक्रिय सहयोग किया, जबकि चीन ने भी प्रभावित इलाकों तक पहुंच आसान बनाने में मदद की।

प्रधानमंत्री शाह ने कहा कि इतने बड़े मानवीय संकट के समय अंतरराष्ट्रीय सहयोग से इनकार करने का कोई सवाल ही नहीं उठता। भारत ने राहत सामग्री और बचाव दल भेजे हैं तथा भारतीय टीमें नेपाली अधिकारियों के साथ मिलकर राहत एवं बचाव अभियान में जुटी हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नेपाल को हरसंभव मानवीय सहायता देने की प्रतिबद्धता जताई है।
भारत की राहत सामग्री की पांचवीं खेप पहुंची
भारत की ओर से नेपाल को राहत सामग्री की पांचवीं खेप भेजी जा चुकी है। भारतीय टीमें प्रभावित क्षेत्रों में बचाव अभियान के साथ शवों की पहचान जैसे जटिल कार्यों में भी सहयोग कर रही हैं। वहीं, सबसे चुनौतीपूर्ण अभियान हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में चल रहा है, जहां लोगों के फंसे होने की आशंका के बीच बचावकर्मी लगातार तलाशी अभियान चला रहे हैं।

चीन ने खोला रास्ता, भारी मशीनरी को मिली पहुंच
आपदा से प्रभावित नेपाल-चीन सीमा क्षेत्र में चीन की ओर से ग्यिरोंग बॉर्डर की दिशा में पहुंच बहाल करने का काम किया गया है। सड़क संपर्क बहाल होने से राहतकर्मियों और भारी बचाव उपकरणों की आवाजाही में मदद मिल रही है।

मौतों और लापता लोगों की संख्या भयावह
नेपाल में आई इस तबाही ने बड़े पैमाने पर जनहानि की है। 2 सितंबर की ताजा रिपोर्टों के अनुसार मृतकों की संख्या 1,100 से अधिक हो चुकी है, जबकि हजारों लोग अब भी लापता हैं। अलग-अलग एजेंसियों की रिपोर्ट में मृतकों और लापता लोगों के आंकड़े अलग-अलग हैं, क्योंकि प्रभावित क्षेत्रों में तलाश और शवों की पहचान का काम लगातार जारी है। नेपाल पुलिस और बचाव दल बड़ी संख्या में कर्मियों के साथ मलबे, नदी क्षेत्रों और सुरंगों में सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं।

पीएम बोले—यह केवल एक इलाके की नहीं, पूरे देश की त्रासदी
संसद को संबोधित करते हुए बालेन शाह ने कहा कि यह आपदा केवल किसी एक जिले या क्षेत्र की नहीं, बल्कि पूरे देश की साझा त्रासदी है। सरकार के सामने अब लापता लोगों की तलाश, शवों की पहचान, प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने और तबाह बुनियादी ढांचे को बहाल करने की बड़ी चुनौती है।
नेपाल में बचाव अभियान जारी है और राहतकर्मी अब भी उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं जिनके सुरंगों या दुर्गम इलाकों में फंसे होने की आशंका है।





































