RAIPUR NEWS. राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर में आयोजित फैशन शो में बदलाव और पुनर्वास की एक प्रेरक तस्वीर देखने को मिली। सुकमा के पुनर्वास केंद्र से आईं आत्मसमर्पित महिलाओं ने छत्तीसगढ़ के पारंपरिक हथकरघा परिधानों में रैंप वॉक कर अपने नए जीवन और मुख्यधारा में लौटने का संदेश दिया।

पुनर्वास केंद्र से पहुंचीं 9 महिलाएं
पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित इस विशेष फैशन शो में सुकमा जिले के पुनर्वास केंद्र से आईं पुनेम देवे, मीडियम गंगी, मड़वी देवे, मड़वी नदन्नी, मड़वी माले, पोड़ियाम राजे, डोड्डी रमे, मड़काम भीमे और पुनेम जोयट्टी ने हिस्सा लिया। सभी महिलाओं ने पूरे आत्मविश्वास के साथ रैंप पर कदम रखा और अपने जीवन में आए बदलाव की कहानी बयां की।

कोसा सिल्क और स्थानीय हथकरघा परिधानों में रैंप वॉक
आत्मसमर्पित महिलाओं ने कोसा सिल्क और स्थानीय हथकरघा से तैयार पारंपरिक परिधान पहनकर रैंप वॉक किया। जैसे ही वे रैंप पर उतरीं, पूरा ऑडिटोरियम तालियों से गूंज उठा। यह दृश्य सिर्फ फैशन का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि हिंसा का रास्ता छोड़कर शांति, विकास और सम्मान के साथ आगे बढ़ने की उनकी यात्रा का प्रतीक बन गया।

सीएम विष्णु देव साय ने की मुलाकात
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी आत्मसमर्पित महिलाओं से मुलाकात कर उनसे बातचीत की। उन्होंने महिलाओं को उनके नए जीवन के लिए शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में उनकी भागीदारी को पुनर्वास और महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक सकारात्मक पहल के रूप में देखा गया।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
इस अनोखे रैंप वॉक का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यूजर्स इसे बदलाव और आत्मविश्वास की प्रेरक तस्वीर बता रहे हैं। लोगों का कहना है कि जिस क्षेत्र ने लंबे समय तक वामपंथी उग्रवाद की चुनौती झेली, वहीं से हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौट रही महिलाओं का इस तरह आत्मविश्वास के साथ रैंप पर उतरना एक महत्वपूर्ण सामाजिक बदलाव का संदेश देता है।
यह आयोजन इस बात का प्रतीक बना कि पुनर्वास केवल किसी व्यक्ति को हिंसा से दूर करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे सम्मान, आत्मनिर्भरता और समाज की मुख्यधारा में नई पहचान के साथ आगे बढ़ने का अवसर देना भी है।






































