JHARKHAND NEWS: झारखंड के पलामू जिले से एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। महिला शिक्षिका भारती पांडेय ने आरोप लगाया है कि मातृत्व अवकाश (मैटरनिटी लीव) स्वीकृत कराने के लिए उनसे ₹50 हजार की रिश्वत मांगी गई। समय पर छुट्टी नहीं मिलने के कारण उन्हें गर्भावस्था के अंतिम चरण तक स्कूल में ड्यूटी करनी पड़ी, जिसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई और गर्भ में पल रहे शिशु की मौत हो गई।

समय पर छुट्टी नहीं मिलने का आरोप
भारती पांडेय तरहसी स्थित सिलदलिया प्लस-2 हाई स्कूल में तैनात हैं और प्रतिनियुक्ति पर चैनपुर के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में भी सेवाएं दे रही थीं। परिवार का आरोप है कि उन्होंने 3 जुलाई को जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) कार्यालय में मातृत्व अवकाश के लिए आवेदन दिया था, लेकिन अवकाश मंजूर करने के बदले ₹50 हजार की रिश्वत मांगी गई। रकम नहीं देने पर छुट्टी स्वीकृत नहीं की गई और उन्हें लगातार स्कूल व कार्यालय के चक्कर लगाने पड़े।

स्कूल में बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में मिला दुखद समाचार
परिजनों के अनुसार, छुट्टी नहीं मिलने के कारण भारती पांडेय नियमित रूप से स्कूल जाती रहीं। इसी दौरान स्कूल परिसर में उन्हें प्रसव पीड़ा शुरू हुई। आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि गर्भ में ही शिशु की मौत हो चुकी है। परिवार ने शिक्षा विभाग पर गंभीर लापरवाही और मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया है।

पति ने दर्ज कराई शिकायत
पीड़ित शिक्षिका के पति मुकेश कुमार तिवारी, जो पुलिस विभाग में कार्यरत हैं, ने पलामू के शहर थाना (मेदिनीनगर) में लिखित शिकायत देकर जिला शिक्षा पदाधिकारी संदीप कुमार और उनके कार्यालय के दो कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि रिश्वत नहीं देने के कारण मातृत्व अवकाश स्वीकृत नहीं किया गया, जिससे यह दुखद घटना हुई।

प्रशासन ने गठित की जांच समिति
मामले के सामने आने के बाद पलामू के उपायुक्त (डीसी) दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने बताया कि तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई गई थी। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि शिक्षिका के आवेदन में चाइल्ड केयर लीव का उल्लेख था, जबकि मातृत्व अवकाश का स्पष्ट जिक्र नहीं किया गया था। इसलिए प्रशासन को मैटरनिटी लीव से जुड़ी जानकारी नहीं थी।

डीसी ने यह भी कहा कि ₹50 हजार रिश्वत मांगने के आरोपों की अलग से जांच की जा रही है। फिलहाल संबंधित क्लर्क को निलंबित कर दिया गया है। यदि विस्तृत जांच में जिला शिक्षा पदाधिकारी या अन्य अधिकारियों की लापरवाही सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
बाबूलाल मरांडी ने की निष्पक्ष जांच की मांग
झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने इस घटना को अमानवीय बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि मातृत्व अवकाश के बदले रिश्वत मांगने के आरोप सही पाए जाते हैं, तो दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।





































