RAIPUR NEWS. शादी के कपड़ों की ड्राईक्लीनिंग में बरती गई लापरवाही एक लॉन्ड्री संचालक पर भारी पड़ गई। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने ड्राईक्लीनिंग और प्रेस के दौरान शेरवानी जलाने के मामले में इसे सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना है। आयोग ने लॉन्ड्री संचालक को पीड़ित उपभोक्ता को कुल 14 हजार रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। इसमें शेरवानी की अनुमानित कीमत, मानसिक क्षतिपूर्ति और वाद व्यय शामिल हैं। शेरवानी की राशि पर परिवाद दायर होने की तारीख से 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देना होगा।

मामला रायपुर जिले के मंदिर हसौद थाना क्षेत्र के ग्राम संकरी निवासी डागेश्वर यादव से जुड़ा है। उन्होंने 8 सितंबर 2019 को पड़ोसी गांव चंद्रखुरी स्थित अशोक निर्मलकर की ड्राईक्लीनिंग दुकान पर शादी के कपड़े धुलाई और प्रेस के लिए दिए थे। इनमें वर-वधू का जोड़ा, कोट-सूट और शेरवानी भी शामिल थी। आरोप है कि प्रेस करते समय कोयले वाली इस्त्री की वजह से शेरवानी सामने की ओर दूसरे बटन के पास जल गई। परिवादी के अनुसार शेरवानी की कीमत करीब 12 हजार रुपये थी।

डागेश्वर यादव ने नुकसान की भरपाई की मांग की, लेकिन लॉन्ड्री संचालक ने भुगतान करने से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने मंदिर हसौद थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले को संज्ञेय अपराध नहीं मानते हुए न्यायालय की शरण लेने की सलाह दी। इसके बाद अधिवक्ता के माध्यम से कानूनी नोटिस भेजा गया और जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर किया गया। आयोग के नोटिस के बावजूद विपक्षी सुनवाई में उपस्थित नहीं हुआ।

बिल पर संदेह, लेकिन तस्वीरों से साबित हुआ नुकसान
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष डाकेश्वर प्रसाद शर्मा तथा सदस्य निरुपमा प्रधान और अनिल कुमार अग्निहोत्री की पीठ ने मामले की सुनवाई की। आयोग ने माना कि प्रस्तुत बिल से 12 हजार रुपये की कीमत पूरी तरह प्रमाणित नहीं होती, लेकिन रिकॉर्ड में मौजूद तस्वीरों से शेरवानी के जलने की पुष्टि होती है। ऐसे में आयोग ने शेरवानी की अनुमानित कीमत 6 हजार रुपये निर्धारित की।

45 दिन के भीतर करना होगा भुगतान
आयोग ने 1 जुलाई 2026 को दिए आदेश में लॉन्ड्री संचालक अशोक निर्मलकर को निर्देश दिया कि वह आदेश की तिथि से 45 दिनों के भीतर परिवादी को 6 हजार रुपये शेरवानी की कीमत के रूप में 8 नवंबर 2019 से भुगतान की तिथि तक 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज सहित अदा करे। इसके अलावा मानसिक एवं शारीरिक कष्ट के लिए 3 हजार रुपये और वाद व्यय के रूप में 5 हजार रुपये का भुगतान भी करे। कुल मिलाकर लॉन्ड्री संचालक को 14 हजार रुपये (ब्याज अलग) अदा करने होंगे।




































