RAIPUR NEWS. छत्तीसगढ़ मंत्रालय में कनिष्ठ सचिवालय सहायकों के नियमित पदों को संविदा और आउटसोर्सिंग के माध्यम से भरने के राज्य सरकार के फैसले का कर्मचारी संगठनों ने कड़ा विरोध शुरू कर दिया है। छत्तीसगढ़ मंत्रालय कर्मचारी संघ ने इस निर्णय को सरकार के चुनावी वादों के विपरीत बताते हुए मुख्य सचिव को पत्र लिखकर भर्ती प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।

कर्मचारी संघ का कहना है कि राज्य गठन के बाद से मंत्रालय की संवेदनशीलता और गोपनीयता को बनाए रखने के लिए कभी भी आउटसोर्सिंग के जरिए नियुक्तियां नहीं की गईं। संघ ने आशंका जताई है कि निजी एजेंसियों के माध्यम से भर्ती होने पर मंत्रालय की गोपनीयता प्रभावित होगी और सरकारी धन का अनावश्यक खर्च बढ़ेगा। साथ ही भर्ती प्रक्रिया में भाई-भतीजावाद और अपारदर्शिता को बढ़ावा मिलने का भी खतरा है।

संघ ने इस नीति को प्रदेश के शिक्षित बेरोजगार युवाओं के हितों के खिलाफ बताते हुए कहा कि इससे दूरस्थ क्षेत्रों के अनुसूचित जनजाति (एसटी), अनुसूचित जाति (एससी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) वर्ग के युवाओं के आरक्षण अधिकार प्रभावित होंगे। संघ ने यह भी कहा कि ई-ऑफिस संचालन में कठिनाई का हवाला देकर पदोन्नत 150 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को दरकिनार करना उचित नहीं है। सरकार को उन्हें प्रशिक्षण देकर कार्य के योग्य बनाना चाहिए।

कर्मचारी संघ ने सवाल उठाया कि जब 20 दिसंबर को छत्तीसगढ़ राज्य कर्मचारी चयन मंडल द्वारा संयुक्त भर्ती परीक्षा प्रस्तावित है, तब सामान्य प्रशासन विभाग ने इन पदों के लिए समय पर मांग पत्र क्यों नहीं भेजा। संघ ने इसे गंभीर जांच का विषय बताते हुए नियमित भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है।

संघ ने मुख्य सचिव से आग्रह किया है कि संविदा और आउटसोर्सिंग के प्रस्ताव को तत्काल निरस्त कर चयन मंडल के माध्यम से नियमित सरकारी भर्ती सुनिश्चित की जाए, ताकि युवाओं के भविष्य और आरक्षण व्यवस्था से कोई समझौता न हो।






































