RAIPUR NEWS. छत्तीसगढ़ में लंबे समय से लंबित पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति पर आखिरकार मुहर लग गई है। राज्य सरकार ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अरुणदेव गौतम को प्रदेश का नया स्थायी डीजीपी नियुक्त किया है। वे पिछले कई महीनों से कार्यवाहक डीजीपी के रूप में जिम्मेदारी निभा रहे थे। राज्य में यह नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब नियमित DGP की नियुक्ति को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे।

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने भी राज्य सरकार से इस मामले में जवाब मांगा था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक किसी भी राज्य में लंबे समय तक कार्यवाहक DGP की व्यवस्था नहीं रखी जा सकती। DGP पद के लिए UPSC ने राज्य सरकार को दो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का पैनल भेजा था। इसमें अरुणदेव गौतम और हिमांशु गुप्ता के नाम शामिल थे। हालांकि वरिष्ठता, मैदानी अनुभव और संवेदनशील जिलों में कामकाज के रिकॉर्ड को देखते हुए सरकार ने गौतम के नाम पर सहमति बनाई।

बताया जा रहा है कि राज्य सरकार काफी समय से अंतिम निर्णय लेने की प्रक्रिया में थी। इसी वजह से नवा रायपुर में आयोजित डीजी कॉन्फ्रेंस में भी छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व कार्यवाहक DGP के तौर पर ही किया गया था। पूर्व डीजीपी अशोक जुनेजा के रिटायरमेंट के बाद फरवरी 2025 में अरुणदेव गौतम को कार्यवाहक DGP बनाया गया था। तभी से यह तय माना जा रहा था कि स्थायी नियुक्ति की दौड़ में वे सबसे आगे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने भी ‘टी. धंगोपल राव बनाम UPSC’ प्रकरण की सुनवाई के दौरान राज्यों में DGP नियुक्ति में देरी पर नाराजगी जताई थी। अदालत ने साफ कहा था कि नियुक्तियों में अनावश्यक देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
यूपी से छत्तीसगढ़ तक का सफर
मूल रूप से उत्तरप्रदेश के कानपुर निवासी अरुणदेव गौतम ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातकोत्तर किया है। इसके बाद उन्होंने जेएनयू से अंतरराष्ट्रीय कानून में एमफिल की पढ़ाई पूरी की। 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी गौतम ने अपने करियर की शुरुआत मध्यप्रदेश कैडर से की थी। बाद में छत्तीसगढ़ राज्य बनने पर उन्होंने यहां का कैडर चुना। उन्होंने रायगढ़, जशपुर, कोरिया, सरगुजा, राजनांदगांव और बिलासपुर जैसे जिलों में एसपी के रूप में सेवाएं दीं।

नक्सल मोर्चे पर अहम भूमिका
नक्सल प्रभावित इलाकों में काम करने का लंबा अनुभव अरुणदेव गौतम की सबसे बड़ी ताकत माना जाता है। वर्ष 2009 में राजनांदगांव में हुए बड़े नक्सली हमले के बाद उन्हें वहां की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके अलावा 2013 के झीरम घाटी हमले के बाद उन्हें बस्तर आईजी बनाया गया था। उस दौरान उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और विधानसभा चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से कराने में अहम भूमिका निभाई थी। राष्ट्रपति पुलिस पदक, भारतीय पुलिस पदक और संयुक्त राष्ट्र पुलिस पदक से सम्मानित गौतम को अब छत्तीसगढ़ पुलिस की नई रणनीति और कानून-व्यवस्था की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है।



































