BILASPUR NEWS. मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) में फर्जी दस्तावेजों के जरिए मुआवजा प्राप्त करने की कथित कोशिश के मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए चार अधिवक्ताओं की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। विशेष न्यायाधीश (एट्रोसिटी) लवकेश प्रताप सिंह बघेल की अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों को राहत देने से इनकार कर दिया।

अभियोजन के अनुसार, सिविल लाइन थाना क्षेत्र में दर्ज प्रकरण के तहत 10वें अतिरिक्त मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में दावा क्रमांक 2533/2025 प्रस्तुत किया गया था। इस दावे में प्रेमिका कुजूर को मृतक प्रभात कुजूर की पत्नी बताकर मुआवजे की मांग की गई थी।

जांच के दौरान असली प्रेमिका कुजूर के अदालत में पेश होने पर पूरे मामले का खुलासा हुआ। उसने स्पष्ट किया कि वह मृतक की पत्नी नहीं, बल्कि उसके भाई की पत्नी (देवरानी) है। साथ ही उसने यह भी बताया कि उसने किसी वकील को अधिकृत नहीं किया और न ही किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए हैं।

फर्जी महिला और दस्तावेजों का इस्तेमाल
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने एक अन्य महिला को प्रेमिका कुजूर बताकर शपथ आयुक्त के समक्ष प्रस्तुत किया और फर्जी दस्तावेज तैयार कर दावा दाखिल किया। इस तरह सुनियोजित तरीके से मुआवजा राशि हासिल करने का प्रयास किया गया।

इन आरोपियों को नहीं मिली राहत
अदालत ने जिन चार आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका (क्र. 732/2026) खारिज की है, वे हैं—
एन.पी. चंद्रवंशी (62 वर्ष)
भगवती कश्यप (50 वर्ष)
शुभम चंद्रवंशी (32 वर्ष)
सूरज वस्त्रकार (29 वर्ष)

कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक धन सिंह सोलंकी ने जमानत का विरोध किया। वहीं बचाव पक्ष ने आरोपियों को अनुभवी अधिवक्ता बताते हुए फंसाए जाने की दलील दी।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अधिवक्ताओं से विधि की जानकारी और नैतिक आचरण की अपेक्षा की जाती है। ऐसे में न्यायिक प्रक्रिया में फर्जीवाड़ा करना गंभीर अपराध है। आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में अपराध पंजीबद्ध होने के कारण उन्हें अग्रिम जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।
कोर्ट के इस फैसले को न्यायिक व्यवस्था में पारदर्शिता और विश्वास बनाए रखने की दिशा में अहम माना जा रहा है।


































