JAGDALPUR NEWS. दंतेवाड़ा जिले के इंद्रावती नदी किनारे बसे छिंदनार गांव ने उस समय ऐतिहासिक पल देखा, जब क्रिकेट जगत के महान खिलाड़ी Sachin Tendulkar अपने परिवार के साथ यहां पहुंचे। उनके आगमन से छिंदनार का खेल मैदान ‘सचिन-सचिन’ के नारों से गूंज उठा और बच्चों की आंखों में नए सपनों की चमक दिखाई दी।

सचिन के साथ उनकी बेटी Sara Tendulkar, परिवार के अन्य सदस्य और Chetna Sinha भी मौजूद रहीं। कार्यक्रम की शुरुआत खेल भावना के साथ हुई, जहां सचिन ने बच्चों के साथ रस्साकशी में हिस्सा लिया। एक तरफ सचिन की टीम थी, जबकि दूसरी ओर सारा की टीम थी, जिसमें सारा की टीम ने जीत दर्ज की। इसके बाद मैदान में ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने हर किसी का दिल जीत लिया।

बच्चों संग खेलते नजर आए ‘क्रिकेट के भगवान’
कार्यक्रम के दौरान सचिन बच्चों के साथ वॉलीबॉल खेलते हुए नजर आए और पूरे उत्साह के साथ खेल का आनंद लिया। उन्होंने खेल मैदान का निरीक्षण भी किया और उन लोगों को सम्मानित किया, जिन्होंने इस खेल परिसर के निर्माण में योगदान दिया।

दंतेवाड़ा जिले में अब तक 25 खेल मैदान तैयार किए जा चुके हैं, जबकि 25 और मैदानों के निर्माण की योजना पर काम जारी है। इस अवसर पर सचिन ने बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि यह पहल 50 मैदानों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि 100 से अधिक खेल मैदानों तक इसका विस्तार किया जाएगा।
बच्चों को मिलेगी कोचिंग और मार्गदर्शन
सचिन ने कहा कि जब उन्हें पता चला कि यहां खिलाड़ी तो हैं, लेकिन मैदान नहीं, तो उन्हें अपना बचपन याद आ गया। उन्होंने कहा कि उनकी जिंदगी भी मैदान से ही शुरू हुई थी और वही मैदान बच्चों के भविष्य की दिशा बदल सकता है।

उन्होंने बताया कि मानदेशी फाउंडेशन और सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन मिलकर बच्चों को केवल खेल मैदान ही नहीं, बल्कि सही कोचिंग, मार्गदर्शन और प्रशिक्षित शिक्षक भी उपलब्ध कराएंगे, ताकि उनकी प्रतिभा को सही दिशा मिल सके।
“अब खेलों से पहचाना जाएगा बस्तर”
सचिन ने बस्तर के बच्चों को हीरे की तरह बताते हुए कहा कि यहां हजारों प्रतिभाएं छिपी हैं, जिन्हें तराशने की जरूरत है। उन्होंने अपने बचपन को याद करते हुए कहा कि उनके पिता ने उन्हें सिखाया था कि क्रिकेट कितने साल चलेगा यह तय नहीं, लेकिन जिंदगी ऐसे जियो कि लोग आपको एक अच्छे इंसान के रूप में याद रखें।

छिंदनार में सचिन का यह दौरा केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक मजबूत संदेश था कि अब बस्तर की पहचान बंदूक नहीं, बल्कि बल्ले और खेल के मैदानों से होगी।
अपने सभी कार्यक्रमों को पूरा करने के बाद सचिन शाम 5 बजे जगदलपुर स्थित मां दंतेश्वरी एयरपोर्ट से दिल्ली के लिए रवाना हो गए।



































