NEW DELHI NEWS. देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण को लेकर देश के नाम अपने संबोधन में इसे भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक अहम मोड़ बताया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करते हुए महिलाओं को विधायिकाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व देना अब सिर्फ एक नीति नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की अनिवार्य आवश्यकता बन चुकी है।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने से शासन व्यवस्था अधिक समावेशी, संवेदनशील और प्रभावी बनेगी। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि देश की आधी आबादी को निर्णय लेने की प्रक्रिया में समान अवसर देना लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करता है और भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में यह एक निर्णायक कदम साबित होगा।

PM के संबोधन की 10 बड़ी बातें
महिला आरक्षण की आवश्यकता पर जोर
संसद और विधानसभा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना लोकतंत्र को और मजबूत बनाएगा।
नारी शक्ति का सम्मान
यह पहल देश की करोड़ों महिलाओं के सपनों और उनके अधिकारों का सम्मान है।
समाज की प्रगति महिलाओं से जुड़ी
पीएम ने कहा कि जब महिलाएं आगे बढ़ती हैं, तभी देश तेजी से आगे बढ़ता है।

निर्णय लेने में महिलाओं की अहम भूमिका
महिलाओं की भागीदारी से नीतियां ज्यादा संतुलित और प्रभावी बनती हैं।
लागू करने पर जोर
आने वाले समय में महिला आरक्षण को प्रभावी रूप से लागू करना जरूरी बताया।
कानून पहले ही पारित
नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ संसद से पारित हो चुका है, जिसे अब जमीन पर उतारना अहम है।

हर क्षेत्र में महिलाओं का योगदान
पीएम ने कहा कि महिलाएं विज्ञान, सेना, खेल और कारोबार में देश का नाम रोशन कर रही हैं।
देरी से नुकसान
महिला प्रतिनिधित्व में देरी लोकतंत्र की गति को प्रभावित करती है।
सर्वसम्मति का आह्वान
सभी दलों से इस मुद्दे पर एकजुट होकर काम करने की अपील की गई।
देश को साथ चलने की अपील
नारी शक्ति को सशक्त बनाने के लिए समाज के हर वर्ग को आगे आने की जरूरत बताई।



































