BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक बेहद संवेदनशील और हृदयविदारक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए दोषी की अपील खारिज कर दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब वैज्ञानिक साक्ष्य मजबूत और निर्विवाद हों, तो वे किसी भी अन्य साक्ष्य से अधिक विश्वसनीय होते हैं। इसी आधार पर कोर्ट ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई प्राकृतिक मृत्यु तक उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा।
डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा कि DNA प्रोफाइलिंग जैसे वैज्ञानिक प्रमाण इस मामले में अकाट्य हैं और यह सीधे तौर पर आरोपी के अपराध की पुष्टि करते हैं।

क्या था पूरा मामला?
यह घटना 13 जनवरी 2020 की है। बीजापुर जिले के जांगला थाना क्षेत्र में रहने वाली 15 वर्षीय नाबालिग लड़की बाजार जाने के लिए घर से निकली थी। परिवार ने उसे अकेले जाने से रोका, लेकिन गांव के ही युवक बबलू कलमूँ ने उसे सुरक्षित वापस लाने का भरोसा दिलाया और अपने साथ ले गया। जब लड़की देर तक घर नहीं लौटी, तो परिजनों ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।

एक हफ्ते बाद मिला शव, स्कूल ड्रेस से पहचान
करीब एक सप्ताह बाद गांव के पास ही किशोरी का क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ। परिजनों ने उसकी पहचान स्कूल ड्रेस के आधार पर की। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि उसके साथ दुष्कर्म के बाद गला दबाकर हत्या की गई थी।

DNA रिपोर्ट बनी केस की सबसे मजबूत कड़ी
इस मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था, लेकिन जांच के दौरान मृतका के शरीर से लिए गए नमूनों का DNA परीक्षण कराया गया। यह DNA आरोपी से पूरी तरह मेल खा गया। साथ ही, आरोपी द्वारा ग्रामीणों के सामने अपराध स्वीकार करने को भी अदालत ने महत्वपूर्ण माना।

ट्रायल कोर्ट का फैसला सही ठहराया
इससे पहले दंतेवाड़ा स्थित पॉक्सो कोर्ट ने आरोपी को IPC की धारा 302, 376(एबी) और पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत दोषी ठहराते हुए प्राकृतिक मृत्यु तक उम्रकैद की सजा सुनाई थी। आरोपी ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन अदालत ने सभी साक्ष्यों को ठोस मानते हुए अपील खारिज कर दी।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी
कोर्ट ने कहा मेडिकल और DNA जैसे वैज्ञानिक साक्ष्य पूरी तरह विश्वसनीय हैं। सभी परिस्थितियां स्पष्ट रूप से आरोपी के अपराध की ओर इशारा करती हैं, जहां संदेह की कोई गुंजाइश नहीं है।




































