RBI POLICY MINUTES: भारतीय रिजर्व बैंक ने महंगाई को लेकर राहत और चिंता, दोनों संकेत दिए हैं। 3 से 5 अगस्त की मौद्रिक नीति समिति यानी MPC बैठक के मिनट्स में केंद्रीय बैंक ने कहा कि हाल में महंगाई में मामूली बढ़ोतरी देखने को मिली है। खास तौर पर खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी चिंता बढ़ा रही है।

RBI की सबसे बड़ी चिंता यह है कि कंपनियों की बढ़ती इनपुट लागत का असर अब धीरे-धीरे खुदरा कीमतों यानी CPI तक पहुंच सकता है। अगर कंपनियों की लागत आगे भी बढ़ती है और इसका बोझ ग्राहकों पर डाला जाता है, तो आने वाले महीनों में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें बढ़ सकती हैं।

अगले 9 महीने कितनी रह सकती है महंगाई?
RBI के आकलन के मुताबिक अगले 9 महीनों में CPI महंगाई औसतन 5.6 फीसदी रह सकती है। यह आंकड़ा इसलिए अहम है क्योंकि RBI का मध्यम अवधि का महंगाई लक्ष्य 4 फीसदी है। हालांकि, केंद्रीय बैंक को उम्मीद है कि तीसरी तिमाही में महंगाई अपने मौजूदा स्तर से नीचे आ सकती है। यानी आगे चलकर महंगाई में कुछ राहत मिलने की संभावना बनी हुई है।

जून में Core Inflation 4% से नीचे
महंगाई की तस्वीर पूरी तरह चिंताजनक नहीं है। RBI के मुताबिक जून में कोर महंगाई 4 फीसदी से नीचे बनी रही। कोर महंगाई में आम तौर पर खाद्य और ईंधन जैसे ज्यादा उतार-चढ़ाव वाले घटकों को अलग रखकर कीमतों के दबाव का आकलन किया जाता है। इस लिहाज से यह RBI के लिए राहत की बात है कि खाद्य और ईंधन को छोड़कर बाकी हिस्सों में महंगाई का दबाव फिलहाल सीमित बना हुआ है।

मॉनसून और अल नीनो से बढ़ा जोखिम
RBI ने मौसम से जुड़े जोखिमों पर भी चिंता जताई है। अनिश्चित मॉनसून और अल नीनो को कृषि क्षेत्र के लिए संभावित खतरे के तौर पर देखा गया है। अगर बारिश सामान्य नहीं रहती या उसका वितरण खराब होता है, तो फसलों का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसका असर सब्जियों, अनाज और दूसरी खाद्य वस्तुओं की सप्लाई पर पड़ सकता है। सप्लाई कम होने और मांग बनी रहने की स्थिति में कीमतें बढ़ सकती हैं।

ईंधन महंगा हुआ तो आपकी जेब पर कैसे पड़ेगा असर?
ईंधन की कीमत बढ़ने का असर सिर्फ पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं रहता। परिवहन महंगा होने से कंपनियों की लागत बढ़ती है। इसके बाद कंपनियां इस अतिरिक्त लागत का कुछ हिस्सा उत्पादों की कीमत बढ़ाकर ग्राहकों से वसूल सकती हैं।
इसे आसान भाषा में समझें—
ईंधन महंगा → परिवहन लागत बढ़ी → कंपनियों की लागत बढ़ी → सामान महंगा होने का दबाव
यही वजह है कि RBI बढ़ती इनपुट कॉस्ट के खुदरा महंगाई तक पहुंचने को लेकर सतर्क है।
FY27 में 6.7% ग्रोथ का अनुमान
महंगाई से जुड़े जोखिमों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर RBI का नजरिया मजबूत बना हुआ है। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 6.7 फीसदी आर्थिक वृद्धि का अनुमान बरकरार रखा है। पहली तिमाही में अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहा है। घरेलू मांग के साथ मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज गतिविधियों ने भी अर्थव्यवस्था को सहारा दिया है। पहली तिमाही में सर्विसेज और मैन्युफैक्चरिंग एक्सपोर्ट भी मजबूत रहने की बात सामने आई है। यानी फिलहाल RBI की बड़ी चिंता आर्थिक विकास की रफ्तार से ज्यादा महंगाई के आगे के रास्ते को लेकर है।
पश्चिम एशिया संकट और कच्चे तेल पर नजर
RBI ने वैश्विक जोखिमों को लेकर भी सावधानी बरतने के संकेत दिए हैं। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से तेल की कीमतों, शिपिंग और सप्लाई चेन पर असर पड़ने की आशंका बनी हुई है। भारत के लिए कच्चे तेल की कीमतें बेहद महत्वपूर्ण हैं। वैश्विक बाजार में तेल महंगा होने पर घरेलू स्तर पर ईंधन और परिवहन लागत पर दबाव बढ़ सकता है, जिसका असर महंगाई पर भी पड़ सकता है।
अमेरिका की ब्याज दरों का भी असर
RBI की नजर अमेरिका की ब्याज दरों पर भी बनी हुई है। वहां ब्याज दरों में कटौती को लेकर अनिश्चितता बढ़ने से वैश्विक वित्तीय बाजारों पर असर पड़ सकता है। अमेरिकी ब्याज दरों में बदलाव से डॉलर, विदेशी पूंजी के प्रवाह और उभरते बाजारों की अर्थव्यवस्थाओं पर असर पड़ता है। भारत भी वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों से अछूता नहीं है।
कुल मिलाकर, RBI के मिनट्स से साफ है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार को लेकर केंद्रीय बैंक फिलहाल आशावादी है, लेकिन खाद्य पदार्थों, ईंधन, मौसम और बढ़ती इनपुट लागत जैसे जोखिमों पर उसकी नजर बनी हुई है। आने वाले महीनों में महंगाई का रुख ही RBI की अगली नीतिगत दिशा के लिए अहम रहेगा।





































