KARNATAKA NEWS. कर्नाटक के मांड्या जिला जेल के एक विचाराधीन कैदी को अस्पताल के कथित अनधिकृत स्पेशल वार्ड में रखे जाने का मामला सामने आया है। कर्नाटक राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण (KSLSA) के औचक निरीक्षण के दौरान यह मामला सामने आया। बताया गया कि कैदी को कोई गंभीर बीमारी नहीं थी और इसके बावजूद उसे विशेष वार्ड में रखा गया था। सूत्रों के मुताबिक, अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान कैदी से उसकी गर्लफ्रेंड ने भी मुलाकात की। इस दावे के बाद अस्पताल और कैदी की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

जमीन रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी के मामले में गिरफ्तार
मामला विचाराधीन कैदी मोहम्मद हुसैन से जुड़ा है। हुसैन को श्रीरंगपट्टनम तालुक के भूमि रिकॉर्ड कार्यालय में कथित अनियमितताओं के मामले में गिरफ्तार किया गया था। बताया गया है कि 2 जुलाई को छापेमारी के बाद उसे हिरासत में लिया गया और 3 जुलाई को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। हुसैन पर भूमि रिकॉर्ड के रजिस्टर, रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण और सरकारी सॉफ्टवेयर में कथित फर्जी रिकॉर्ड तैयार करने से जुड़ी गड़बड़ियों में मदद करने का आरोप है। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत शिकायत दर्ज की गई है।

कोर्ट की अनुमति के बिना स्पेशल वार्ड में रखने का आरोप
बताया जा रहा है कि जेल के मेडिकल ऑफिसर की सलाह पर हुसैन को MIMS अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालांकि, KSLSA की जांच में सामने आया कि उसे अस्पताल के एक स्पेशल वार्ड में कोर्ट की अनुमति के बिना रखा गया था। KSLSA की टीम ने सोमवार शाम MIMS अस्पताल का दौरा किया और कैदी के भर्ती होने से लेकर उसके इलाज तक की व्यवस्था का निरीक्षण किया। टीम ने अस्पताल में कैदी को उपलब्ध कराई गई सुविधाओं से जुड़ी जानकारी भी जुटाई।

गर्लफ्रेंड से मुलाकात के दावे से बढ़ा विवाद
सूत्रों के हवाले से यह भी दावा किया गया है कि अस्पताल में रहने के दौरान हुसैन ने अपनी गर्लफ्रेंड से मुलाकात की थी। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है। इस घटना के सामने आने के बाद कैदियों को अस्पताल में मिलने वाली सुविधाओं और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। इसे लेकर कैदियों को कथित VIP ट्रीटमेंट दिए जाने की चर्चा भी तेज हो गई है।

पुलिस ने क्या कहा?
पुलिस सूत्रों के अनुसार, विचाराधीन कैदी जेल प्रशासन के सीधे अधिकार क्षेत्र में नहीं था। स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर, जो कैदियों की जांच के लिए आते हैं, उनकी सलाह पर हुसैन को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पुलिस के मुताबिक, उस समय कैदी मांड्या जिला पुलिस की हिरासत में था। ऐसे में अस्पताल में भर्ती करने और इलाज से जुड़ी प्रक्रिया में स्वास्थ्य विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण थी।





































