RAJNANDGAON NEWS. राजनांदगांव की विशेष POCSO अदालत ने नाबालिग के यौन शोषण और उसे देह व्यापार में धकेलने के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने पांच आरोपियों को अलग-अलग गंभीर धाराओं में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने अपने फैसले में ऐसे अपराधों को गंभीर बताते हुए दोषियों के प्रति किसी तरह की नरमी नहीं बरतने की बात कही। वहीं, मामले में एक अन्य आरोपी गोपीराम कोल को पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।

2024 में सामने आया था मामला
मामला फरवरी 2024 का है। नाबालिग के पिता ने छुरिया थाने में बेटी के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और तकनीकी साक्ष्यों की मदद से नाबालिग को रायगढ़ से बरामद किया। जांच में सामने आया कि नाबालिग को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाया गया था। पुलिस के अनुसार, बरामदगी के समय वह साधना वैष्णव के संपर्क में थी। जांच के मुताबिक, नाबालिग घर से बैंक में आधार लिंक कराने के लिए निकली थी। इसके बाद वह बस से राजनांदगांव होते हुए रायपुर जा रही थी। इसी दौरान उसकी मुलाकात साधना वैष्णव से हुई।

आरोप है कि साधना ने नाबालिग को अपने साथ चलने के लिए कहा और उसे रायपुर ले गई, जहां मुस्कान गोस्वामी भी रहती थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, नाबालिग को कई दिनों तक रायपुर में रखा गया। उसने अपने घर वापस जाने की इच्छा जताई, लेकिन उसे जाने नहीं दिया गया। आरोप है कि बाद में उस पर पैसे कमाने के लिए दबाव बनाया गया और अलग-अलग लोगों के जरिए उसका यौन शोषण कराया गया। जांच के दौरान नाबालिग को रायगढ़ के बाजीनपाली क्षेत्र में ले जाने की बात भी सामने आई।

पांच दोषियों को सुनाई गई उम्रकैद
अदालत ने मामले में साधना वैष्णव और मुस्कान गोस्वामी को गंभीर धाराओं में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा चेतन नवरंगे, तोरण सोनकर और धनंजय धृतलहरे को भी सामूहिक दुष्कर्म और POCSO एक्ट की धाराओं के तहत दोषी मानते हुए कठोर सजा दी गई।

एक आरोपी को साक्ष्य के अभाव में किया बरी
मामले में आरोपी गोपीराम कोल के खिलाफ आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर अदालत ने उसे दोषमुक्त कर दिया। अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों और मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने पांच आरोपियों को दोषी माना। POCSO कोर्ट के इस फैसले को नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराध और उनके शोषण के मामलों में कड़ा संदेश माना जा रहा है।






































