NEW DELHI NEWS. लोकसभा में मंगलवार को पेपर लीक की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए लाए गए ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने सरकार की नीयत और शिक्षा व्यवस्था को लेकर तीखे सवाल उठाए, वहीं सरकार ने विधेयक को परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और नकल-धांधली पर रोक लगाने की दिशा में अहम कदम बताया।

केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि प्रस्तावित संशोधन भविष्य में पेपर लीक और परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल को रोकने में मददगार साबित होगा।
कांग्रेस ने पूछा—छात्रों पर लाठीचार्ज का आदेश किसने दिया?
बहस के दौरान कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक सुधार को लेकर गंभीर नहीं है। उन्होंने विधेयक को महज दिखावा बताते हुए छात्रों से जुड़े मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने सवाल उठाया कि छात्रों पर लाठीचार्ज और पैलेट गन चलाने का आदेश आखिर किसने दिया था।

अखिलेश बोले—‘वचन नहीं, सिर्फ जुमले’
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी सरकार को घेरते हुए तीखा हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता को वचन देने के बजाय सिर्फ जुमले देती है। उनके बयान के बाद सदन में सियासी माहौल और गर्म हो गया।

6 घंटे से बढ़कर 8 घंटे हुई चर्चा, 10 घंटे तक तैयार सरकार
विधेयक पर बहस के समय को लेकर भी सदन में चर्चा हुई। दोपहर के सत्र में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शुरुआत में विधेयक पर चर्चा के लिए छह घंटे का समय तय किया था। उन्होंने कहा था कि सत्ता पक्ष और विपक्ष की सहमति से चर्चा का समय बढ़ाया जा सकता है।

इसके बाद केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार ने सभी राजनीतिक दलों से चर्चा की है। अब विधेयक पर करीब 8 घंटे चर्चा होगी और जरूरत पड़ने पर इसे बढ़ाकर 10 घंटे तक किया जा सकता है।
पेपर लीक जैसे मामलों पर सख्ती के उद्देश्य से लाए गए इस संशोधन विधेयक पर अब सदन में होने वाली बहस पर सभी की निगाहें टिकी हैं। विपक्ष जहां सरकार से छात्रों और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों पर जवाब मांग रहा है, वहीं सरकार संशोधन को परीक्षा प्रणाली को अधिक मजबूत बनाने की दिशा में जरूरी कदम बता रही है।






































