DURG NEWS. न्याय को अधिक सुलभ, सरल और सौहार्दपूर्ण बनाने के उद्देश्य से आयोजित समाधान समारोह-2026 के तहत लंबित प्रकरणों के त्वरित निराकरण के लिए शनिवार को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के. विनोद कुजूर की अध्यक्षता में मध्यस्थ (मेडिएटर) अधिवक्ताओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

बैठक में समाधान समारोह के अंतर्गत प्राप्त प्रकरणों के अधिकाधिक सहमति आधारित निपटारे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने निर्देश दिए कि प्रत्येक प्रकरण में पक्षकारों की उपस्थिति हर हाल में सुनिश्चित की जाए। जिन मामलों में आवश्यकता हो, उनमें दोबारा समन जारी कर समय पर तामील कराई जाए, ताकि किसी भी प्रकरण के निराकरण में अनावश्यक विलंब न हो।

उन्होंने अधिवक्ताओं से प्रत्येक मामले में समझौते की संभावनाओं को गंभीरता से तलाशने और समाधान समारोह को सफल बनाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। बैठक के दौरान मध्यस्थता प्रक्रिया में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों, पक्षकारों की उपस्थिति, समन तामील और अन्य प्रशासनिक विषयों की भी समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

बैठक में 18 जुलाई 2026 को आयोजित होने वाली परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 (चेक बाउंस) से संबंधित मामलों की विशेष लोक अदालत की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। इस दौरान मध्यस्थ अधिवक्ताओं से अधिक से अधिक मामलों का आपसी सहमति से निराकरण कराने के लिए समन्वित प्रयास करने का आग्रह किया गया।

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने कहा कि समाधान समारोह-2026 और विशेष लोक अदालत का उद्देश्य केवल लंबित मामलों का निपटारा करना नहीं, बल्कि पक्षकारों को त्वरित, सुलभ और सौहार्दपूर्ण न्याय उपलब्ध कराना भी है। उन्होंने सभी अधिकारियों, मध्यस्थों और अधिवक्ताओं से इस जनहितकारी पहल को सफल बनाने के लिए पूर्ण समर्पण के साथ कार्य करने की अपील की।
बैठक में स्थायी एवं निरंतर लोक अदालत दुर्ग की अध्यक्ष श्रीमती सुषमा लकड़ा, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग के सचिव उमेश कुमार भागवतकर सहित मध्यस्थ अधिवक्तागण उपस्थित रहे।






































