RAIPUR NEWS. छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोल लेवी (कोयला घोटाला) मामले में कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को बड़ा झटका लगा है। रायपुर की विशेष अदालत ने उन्हें 17 जुलाई तक आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) की रिमांड पर भेज दिया है। गिरफ्तारी के बाद गुरुवार को EOW ने उन्हें विशेष अदालत में पेश किया, जहां एजेंसी ने पूछताछ के लिए रिमांड की मांग की, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।

अब अगले आठ दिनों तक EOW की टीम रामगोपाल अग्रवाल से कथित अवैध वसूली के पैसों के लेन-देन, रकम के उपयोग, वित्तीय नेटवर्क और इस पूरे मामले में अन्य लोगों की भूमिका को लेकर गहन पूछताछ करेगी। जांच एजेंसी को उम्मीद है कि पूछताछ से कोल लेवी और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं।

रामगोपाल अग्रवाल लंबे समय से फरार चल रहे थे। उनकी लगातार गैरहाजिरी के चलते अदालत ने उनके खिलाफ स्थायी वारंट जारी किया था। EOW ने पिछले एक सप्ताह से उनकी गिरफ्तारी के लिए दबाव बढ़ाया हुआ था। इस दौरान उनके बेटे वैभव अग्रवाल से लगातार दो दिनों तक पूछताछ की गई। इसके बाद रामगोपाल अग्रवाल ने सरेंडर किया, जिसके तुरंत बाद EOW ने उन्हें कोल लेवी मामले में गिरफ्तार कर लिया।

डायरी की एंट्री बनी जांच का बड़ा आधार
EOW के सूत्रों के मुताबिक, कोल लेवी स्कैम के मुख्य आरोपी सूर्यकांत तिवारी के पास से जब्त डायरी में करोड़ों रुपये के लेन-देन का उल्लेख मिला है। जांच एजेंसी का दावा है कि कोल लेवी और कथित शराब घोटाले से हुई अवैध वसूली की रकम को रामगोपाल अग्रवाल के माध्यम से विभिन्न स्थानों पर पहुंचाया गया। अब एजेंसी इसी वित्तीय ट्रेल की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

पूछताछ में कई नए खुलासों की उम्मीद
जांच एजेंसी का मानना है कि रिमांड के दौरान होने वाली पूछताछ से अवैध धन के प्रवाह, उससे जुड़े लोगों और कथित नेटवर्क के संचालन को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। यदि नए तथ्य सामने आते हैं तो मामले में अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।






































