NEW DELHI NEWS. संसद के मानसून सत्र का पहला दिन सोमवार को भारी हंगामे की भेंट चढ़ गया। नीट (NEET) पेपर लीक, राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई जैसे मुद्दों को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए दोनों सदनों में जोरदार नारेबाजी की। लगातार व्यवधान के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही छह बार स्थगित करनी पड़ी।

सत्र की शुरुआत होते ही विपक्षी सांसद पोस्टर और बैनर लेकर सदन में पहुंचे तथा सरकार के खिलाफ नारे लगाने लगे। हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही सामान्य रूप से नहीं चल सकी और अधिकांश समय शोर-शराबे में ही बीत गया।राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों की आवाज को दबाने के लिए बल प्रयोग किया गया।


इधर, सदन में जारी हंगामे के बीच केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने से संबंधित महत्वपूर्ण विधेयक लोकसभा में पेश किया। हालांकि विपक्ष के विरोध के कारण इस पर विस्तृत चर्चा नहीं हो सकी।सत्र शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए सभी दलों से रचनात्मक और सार्थक चर्चा की अपील की। उन्होंने कहा कि मानसून सत्र देशहित के महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीर विमर्श का अवसर है और सभी सांसदों को तर्क तथा तथ्यों के आधार पर चर्चा में भाग लेना चाहिए।

प्रधानमंत्री की अपील के बावजूद पहले ही दिन संसद में गतिरोध बना रहा। विपक्ष ने विभिन्न मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगते हुए अपना विरोध जारी रखा, जबकि सरकार ने सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने की आवश्यकता पर जोर दिया। परिणामस्वरूप मानसून सत्र का पहला दिन राजनीतिक टकराव और लगातार हंगामे के नाम रहा।






































