RAIPUR NEWS. भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के अवसर पर शुक्रवार को राजधानी रायपुर में विभिन्न जगन्नाथ मंदिरों से भव्य शोभायात्राएं और रथयात्राएं निकाली जाएंगी। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना को देखते हुए प्रशासन, पुलिस और आयोजन समितियों ने सुरक्षा एवं यातायात की विशेष व्यवस्था की है। शहर के प्रमुख मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है और यात्रा मार्गों पर साफ-सफाई सहित अन्य तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

रथयात्रा के दौरान कई प्रमुख मार्गों पर श्रद्धालुओं की भीड़ और वाहनों का दबाव बढ़ने की संभावना है। ऐसे में लोगों से अपील की गई है कि वे यात्रा मार्गों से बचते हुए वैकल्पिक रास्तों का उपयोग करें और यातायात पुलिस के निर्देशों का पालन करें। इस बार रथयात्रा ऐसे समय हो रही है, जब राजधानी के सबसे व्यस्त इलाकों में रैली, जुलूस और शोभायात्राओं को लेकर नई व्यवस्था लागू है।

रायपुर पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत आदेश जारी कर 14 जुलाई से अगले दो माह तक सुबह 9 बजे से रात 9 बजे के बीच जयस्तंभ चौक और उससे जुड़े प्रमुख मार्गों पर किसी भी प्रकार की रैली, जुलूस, शोभायात्रा और धरना-प्रदर्शन पर रोक लगाई है। प्रतिबंधित मार्गों में जीई रोड पर जयस्तंभ चौक से शारदा चौक और शास्त्री चौक तक, मालवीय रोड पर जयस्तंभ चौक से कोतवाली चौक, सदर बाजार रोड से सत्ती बाजार चौक, तात्यापारा मार्ग तथा एमजी रोड पर गुरूनानक चौक से शारदा चौक तक का हिस्सा शामिल है।

आदेश के अनुसार धार्मिक शोभायात्राओं और जुलूसों की अनुमति केवल सुबह 9 बजे से पहले या रात 9 बजे के बाद ही दी जाएगी, ताकि व्यस्त समय में यातायात प्रभावित न हो। गायत्री नगर स्थित जगन्नाथ मंदिर में इस वर्ष भी ओडिशा से आए कलाकारों ने पारंपरिक शैली में मंदिर और रथों को सजाया है। मंदिर की दीवारों, प्रवेश द्वार और रथों पर पारंपरिक चित्रकारी और धार्मिक अलंकरण किए गए हैं। वहीं, भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की पूजा-अर्चना तथा रथयात्रा के सभी धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराने के लिए ओडिशा से पुजारियों को भी आमंत्रित किया गया है।

500 साल पुरानी आस्था का केंद्र
पुरानी बस्ती स्थित टुरी-हटरी का जगन्नाथ मंदिर रायपुर के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक माना जाता है। लगभग 500 वर्ष पुराने इस मंदिर को पहले ‘साहूकार मंदिर’ के नाम से जाना जाता था। अग्रवाल परिवार द्वारा निर्मित इस मंदिर में भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा स्थापित होने के बाद इसकी पहचान जगन्नाथ मंदिर के रूप में बनी। टुरी-हटरी स्थित मंदिर परिसर में भगवान जगन्नाथ के अलावा श्रीराम दरबार, दो शिव मंदिर, संतोषी माता मंदिर, गरुड़ मंदिर और संकटमोचन हनुमान मंदिर भी हैं। इसी वजह से यह परिसर वर्षभर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना रहता है, जबकि रथयात्रा के दिन यहां विशेष धार्मिक उत्सव और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।






































