DURG NEWS. अपनी विभिन्न मांगों को लेकर पिछले 23 दिनों से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे छत्तीसगढ़ के अतिथि शिक्षकों ने फिलहाल अपना आंदोलन स्थगित करने की घोषणा कर दी है। सरकार की ओर से सकारात्मक आश्वासन मिलने के बाद यह फैसला लिया गया है। हालांकि अतिथि शिक्षक संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि 5 सितंबर 2026 तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो वे दोबारा प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करेंगे।

दुर्ग में आयोजित प्रेसवार्ता में अतिथि शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि उनका उद्देश्य आंदोलन करना नहीं था, लेकिन वर्ष 2016 से मिल रहा मानदेय मौजूदा महंगाई के मुकाबले बेहद कम है। उनका कहना है कि कई अतिथि शिक्षक 25 किलोमीटर तक पैदल चलकर और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में जोखिम उठाकर विद्यार्थियों को शिक्षा देने पहुंचते हैं, फिर भी उन्हें पर्याप्त पारिश्रमिक नहीं मिलता।

संघ का दावा है कि दुर्गम क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में अतिथि शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसके बावजूद नियमित शिक्षकों और स्वामी आत्मानंद स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों की तुलना में उन्हें काफी कम मानदेय दिया जा रहा है। जहां नियमित शिक्षकों का वेतन लगभग एक लाख रुपये और स्वामी आत्मानंद स्कूलों के शिक्षकों का मानदेय करीब 38 हजार रुपये तक है, वहीं अतिथि शिक्षकों को केवल 20 हजार रुपये प्रतिमाह मिलते हैं।

अतिथि शिक्षकों ने वेतन वृद्धि, 12 महीने का मानदेय, 13 आकस्मिक अवकाश (सीएल), मातृत्व अवकाश, सामान्य अवकाश और भविष्य में नियमितीकरण की मांग दोहराई। उनका आरोप है कि पूरे वर्ष कार्य कराने के बावजूद उन्हें केवल साढ़े दस माह का ही मानदेय दिया जाता है।

संघ के अनुसार, सरकार की ओर से उनकी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक संकेत मिलने के बाद फिलहाल हड़ताल स्थगित की गई है। हालांकि आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और कथित दुर्व्यवहार पर शिक्षकों ने नाराजगी भी जताई। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 5 सितंबर तक मांगों पर ठोस फैसला नहीं हुआ तो आंदोलन फिर से शुरू किया जाएगा।






































