WASHINGTON NEWS. अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की कोशिशों के बीच दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल स्विट्जरलैंड में शांति वार्ता के लिए पहुंच गए हैं। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि यदि 60 दिनों के भीतर कोई स्थायी समझौता नहीं होता, तो अमेरिका भविष्य में दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगाने पर विचार कर सकता है। ट्रम्प ने कहा कि प्रस्तावित शुल्क का उद्देश्य मध्य-पूर्व में सुरक्षा व्यवस्था पर अमेरिका द्वारा किए गए खर्च की भरपाई करना होगा।

हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि संघर्षविराम (सीजफायर) की अवधि के दौरान अगले 60 दिनों तक किसी भी जहाज से कोई टोल नहीं वसूला जाएगा। शांति वार्ता में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति JD Vance कर रहे हैं। उनके साथ विशेष दूत Steve Witkoff और ट्रम्प के दामाद Jared Kushner भी मौजूद हैं। दूसरी ओर ईरानी प्रतिनिधिमंडल की कमान विदेश मंत्री Abbas Araghchi के हाथ में है, जबकि संसद अध्यक्ष Bagher Ghalibaf भी बातचीत का हिस्सा हैं।

इस बीच, पाकिस्तान सेना प्रमुख असिम मुनीर भी स्विट्जरलैंड पहुंच चुके हैं। रिपोर्टों के अनुसार, वे अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत में पाकिस्तान की ओर से मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान के साथ हुए समझौता ज्ञापन (MoU) को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में पाकिस्तान ने अमेरिका की महत्वपूर्ण मदद की है।

घटनाक्रम की 4 बड़ी बातें
जहाजों को चेतावनी: ईरान की Islamic Revolutionary Guard Corps ने होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास से गुजरने वाले जहाजों को चेतावनी देते हुए कहा है कि इस क्षेत्र में आवाजाही करने वालों की सुरक्षा की गारंटी नहीं दी जा सकती।
ईरानी प्रतिनिधिमंडल रवाना: ईरान का उच्चस्तरीय दल अमेरिका के साथ वार्ता के लिए स्विट्जरलैंड पहुंच गया है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं।

भारत से जुड़े तेल टैंकर सुरक्षित निकले: भारतीय ध्वज वाले तीन तेल टैंकर शनिवार को सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर भारत के लिए रवाना हुए। इनमें 8.6 लाख मीट्रिक टन से अधिक कच्चा तेल और 94 भारतीय चालक दल के सदस्य सवार बताए गए हैं।
नेतन्याहू का सख्त संदेश: इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कहा है कि देश की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी।

शांति समझौते की असली परीक्षा ईरान के ऊर्जा-तेल क्षेत्र में दिखेगी
ईरान के तेल मंत्री Mohsen Paknejad का कहना है कि अमेरिका के साथ किसी भी अंतिम शांति समझौते की असली परीक्षा ईरान के ऊर्जा और तेल क्षेत्र में दिखाई देगी। उनके अनुसार, यदि प्रतिबंधों में ढील मिलती है और समझौते का पूरी तरह पालन होता है, तो विदेशी निवेशकों के लिए ईरान का ऊर्जा क्षेत्र बड़े अवसर लेकर आएगा। उन्होंने कहा कि तेल, गैस और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े सैकड़ों निवेश प्रोजेक्ट पहले से तैयार हैं तथा तकनीकी सहयोग और साझेदारी के कई समझौते हस्ताक्षर की प्रतीक्षा में हैं। ऐसे में सफल समझौता ईरान की अर्थव्यवस्था और वैश्विक ऊर्जा बाजार दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।





































