WASHINGTON NEWS. ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को घरेलू राजनीति में बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी संसद के निचले सदन में एक ऐसा प्रस्ताव पारित किया गया है, जिसका उद्देश्य ईरान के खिलाफ राष्ट्रपति की सैन्य कार्रवाई की शक्तियों को सीमित करना है। इस प्रस्ताव को 215-208 मतों से मंजूरी मिली, जिसमें चार रिपब्लिकन सांसदों ने भी डेमोक्रेट्स के साथ मतदान किया। यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि ट्रंप प्रशासन की ईरान नीति को लेकर उनकी अपनी पार्टी के भीतर भी असहजता दिखाई देने लगी है।

इस दौरान कई सांसदों का मानना है कि मध्य पूर्व में अमेरिका को एक और लंबे और अनिश्चितकालीन सैन्य संघर्ष में नहीं उलझना चाहिए। ईरान के साथ जारी संघर्ष को संभालने के ट्रंप प्रशासन के तरीके पर सवाल उठने लगे हैं। प्रस्ताव के समर्थन में डेमोक्रेट सांसदों के साथ चार रिपब्लिकन सांसदों का आना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि युद्ध को लेकर पार्टी के भीतर भी मतभेद मौजूद हैं।

सदन के अध्यक्ष Mike Johnson ने प्रस्ताव को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की थी, लेकिन बढ़ते राजनीतिक दबाव और युद्ध को लेकर चिंताओं के बीच यह सदन से पारित हो गया। हालांकि प्रस्ताव के पारित होने के बावजूद इसका कानून बनना अभी तय नहीं है। इसे प्रभावी होने के लिए अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों—हाउस और सीनेट—से मंजूरी मिलनी होगी। इसके बाद भी राष्ट्रपति के पास वीटो का अधिकार रहेगा।

विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर सकते हैं, लेकिन सदन में इसकी मंजूरी को उनकी युद्ध नीति के खिलाफ एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। प्रस्ताव के प्रायोजक Gregory Meeks ने मतदान के बाद कहा कि यह परिणाम एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है। उनके अनुसार, अधिक से अधिक रिपब्लिकन सांसद अपने मतदाताओं की भावनाओं को समझ रहे हैं, जो मध्य पूर्व में अमेरिका की एक और लंबी सैन्य भागीदारी नहीं चाहते।

दोनों दलों का दुर्लभ साझा प्रयास
अमेरिकी राजनीति में आमतौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के मुद्दों पर तीखे मतभेद देखने को मिलते हैं। ऐसे में राष्ट्रपति की युद्ध संबंधी शक्तियों को सीमित करने के लिए दोनों दलों के नेताओं का एक मंच पर आना एक असामान्य राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है। यदि यह प्रस्ताव आगे की प्रक्रिया में भी सफल रहता है, तो यह अमेरिका की ईरान नीति और राष्ट्रपति की सैन्य शक्तियों को लेकर नई बहस को जन्म दे सकता है।




































