WASHINGTON NEWS. मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी तनाव और टकराव के बीच दुनिया के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच बहुप्रतीक्षित शांति समझौते को लेकर सहमति बन गई है। दोनों देशों ने युद्ध विराम, समुद्री सुरक्षा और भविष्य की कूटनीतिक बातचीत को लेकर तैयार किए गए समझौते के मसौदे पर सहमति जता दी है। यदि सब कुछ तय कार्यक्रम के अनुसार हुआ तो 19 जून को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में इस ऐतिहासिक समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे।

जिनेवा में होगी हाई-लेवल बैठक
कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, समझौते को अंतिम रूप देने के लिए दोनों देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधि जिनेवा में आमने-सामने बैठक करेंगे। इस पहल को क्षेत्रीय शांति की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि इस समझौते से मध्य पूर्व में सैन्य तनाव कम होने के साथ वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को भी राहत मिलेगी।

ट्रम्प का बड़ा ऐलान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया के माध्यम से समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत दिए। उन्होंने कहा कि शांति और स्थिरता के लिए उठाया गया यह कदम वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगा। ट्रम्प ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को फिर से सुचारू रूप से संचालित करने की बात कहते हुए लिखा, दुनिया के जहाजों, अपने इंजन चालू कर लो। तेल को बहने दो।

वैश्विक तेल बाजार को मिलेगी राहत
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समझौता लागू होता है तो होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही सामान्य होने से कच्चे तेल की आपूर्ति पर बना दबाव कम होगा। इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर भी पड़ सकता है। दुनिया के बड़े ऊर्जा आयातक देशों के लिए यह खबर राहत लेकर आई है।

14 सूत्रीय मसौदे में शांति का रोडमैप
सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित 14 सूत्रीय समझौता पत्र में युद्ध की आशंकाओं को कम करने, समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, प्रतिबंधों में चरणबद्ध ढील और भविष्य में संवाद की प्रक्रिया जारी रखने जैसे महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं। समझौते को क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक आर्थिक संतुलन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दुनिया की नजरें 19 जून पर
अब पूरी दुनिया की नजरें 19 जून को जिनेवा में होने वाली बैठक पर टिकी हैं। यदि समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर हो जाते हैं तो इसे हाल के वर्षों की सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धियों में गिना जाएगा और मध्य पूर्व में शांति स्थापना की दिशा में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जाएगी।





































