WASHINGTON NEWS. ईरान को लेकर बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिका और इजराइल के रिश्तों में रणनीतिक मतभेद खुलकर सामने आते दिख रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति और इजराइल के प्रधानमंत्री के बीच ईरान पर सैन्य कार्रवाई को लेकर गंभीर असहमति उभर आई है। जहां इजराइल ईरान पर आक्रामक रुख बनाए रखने के पक्ष में है, वहीं ट्रम्प फिलहाल हमले रोककर बातचीत और समझौते की संभावना तलाशना चाहते हैं।

अमेरिकी मीडिया नेटवर्क की रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को ट्रम्प और नेतन्याहू के बीच करीब एक घंटे तक फोन पर अहम बातचीत हुई। रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया है कि इस दौरान नेतन्याहू ने साफ कहा कि ईरान पर प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई रोकना “बड़ी गलती” होगी और मौजूदा हालात में दबाव बनाए रखना जरूरी है। इजराइल की चिंता है कि इस समय नरमी बरतने से ईरान को दोबारा रणनीतिक बढ़त मिल सकती है।

आखिरी वक्त पर टला ‘ऑपरेशन स्लेजहैमर’
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प प्रशासन ने ईरान पर एक संभावित लक्षित हमले की तैयारी की थी, जिसे कथित तौर पर ऑपरेशन स्लेजहैमर नाम दिया गया था। बताया जा रहा है कि राष्ट्रपति ट्रम्प ने इसकी जानकारी नेतन्याहू को भी दी थी, लेकिन करीब 24 घंटे बाद अचानक इस प्रस्तावित कार्रवाई को फिलहाल टालने का फैसला कर लिया गया।

इस फैसले के बाद इजराइली नेतृत्व की नाराजगी सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, नेतन्याहू का मानना है कि ऐसे समय में पीछे हटना ईरान के लिए राहत साबित हो सकता है।

खाड़ी देशों की अपील के बाद बदला अमेरिकी रुख
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका ने यह फैसला कूटनीतिक दबाव और क्षेत्रीय हालात को देखते हुए लिया। बताया जा रहा है कि , और जैसे खाड़ी देशों ने अमेरिका से सैन्य कार्रवाई टालने की अपील की थी। इन देशों को आशंका है कि यदि संघर्ष बढ़ा तो पूरा मध्य-पूर्व बड़े युद्ध में बदल सकता है, जिसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति, व्यापार और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

हालांकि, अमेरिका और इजराइल की ओर से इन दावों पर आधिकारिक रूप से विस्तृत पुष्टि सामने नहीं आई है, लेकिन रिपोर्ट के बाद दोनों सहयोगी देशों के बीच रणनीतिक मतभेद की चर्चा तेज हो गई है।


































