Monsoon Update: भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक इस साल अल नीनो का असर मौसम पर दिखाई दे सकता है, जिसकी वजह से मानसून की चाल सामान्य से अलग रहने की संभावना है। हालांकि अल नीनो को आमतौर पर कमजोर मानसून से जोड़ा जाता है, लेकिन समुद्री और वायुमंडलीय परिस्थितियों के कारण इस बार मानसून की शुरुआती दस्तक समय से पहले हो सकती है। अनुमान है कि मानसून 26 मई को केरल पहुंच सकता है, जो लगातार दूसरा साल होगा जब इसकी एंट्री सामान्य तारीख से पहले होगी।
पिछले कुछ वर्षों में मानसून की टाइमिंग में लगातार बदलाव देखने को मिला है। साल 2025 में मानसून 24 मई को केरल पहुंच गया था, जो सामान्य से काफी पहले था। वहीं 2024 में यह 30 मई को पहुंचा, जबकि 2023 में मानसून 8 जून को केरल पहुंचा था, यानी करीब एक हफ्ते की देरी से। ये बदलाव बदलते क्लाइमेट पैटर्न और मौसम की अनिश्चितता की ओर इशारा करते हैं।
मानसून का जल्दी आना सिर्फ मौसम की खबर नहीं होती, बल्कि इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और खेती पर पड़ता है। भारत की बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है और कृषि का बड़ा हिस्सा मानसून आधारित है। अगर बारिश अच्छी रहती है तो धान, दाल, गन्ना और सोयाबीन जैसी खरीफ फसलों की बुवाई समय पर शुरू हो सकती है, जिससे किसानों को राहत मिलती है।
जल्दी मानसून आने से भीषण गर्मी और हीटवेव से राहत मिलने की उम्मीद भी बढ़ जाती है। दिल्ली समेत उत्तर भारत के लोग अब मानसून की रफ्तार पर नजर बनाए हुए हैं। आमतौर पर केरल पहुंचने के बाद मानसून को दिल्ली तक पहुंचने में करीब एक महीना लग जाता है, हालांकि इसकी गति हर साल अलग हो सकती है। पिछले साल 2025 में दिल्ली में मानसून लगभग 29 जून के आसपास पहुंचा था।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की शुरुआती एंट्री अच्छी खबर जरूर है, लेकिन सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण पूरे सीजन की बारिश होती है। सिर्फ जल्दी पहुंचना ही काफी नहीं है, बल्कि यह जरूरी है कि पूरे मानसून सीजन में बारिश संतुलित बनी रहे। यदि इस साल बारिश सामान्य या उससे बेहतर रहती है, तो जलाशयों का स्तर सुधरेगा, बिजली उत्पादन को फायदा मिलेगा और खाद्य महंगाई पर भी नियंत्रण देखने को मिल सकता है।



































