Jalaun News जालौन: उत्तर प्रदेश के जालौन जिले से एक प्रेरणादायक पहल सामने आई है, जिसने यह साबित कर दिया कि शिक्षा हासिल करने की कोई उम्र नहीं होती। यहां 60 से 78 वर्ष की उम्र के नौ बुजुर्गों ने एक बार फिर स्कूल का रुख किया और औपचारिक शिक्षा से जुड़कर नई शुरुआत की।

यह पहल उपजिलाधिकारी (SDM) रिंकू सिंह राही के प्रयास से संभव हो सकी। उनके निर्देशन में छानी गांव के प्राथमिक और जूनियर हाई स्कूल में इन बुजुर्गों का दाखिला कराया गया। जब ये नए छात्र स्कूल पहुंचे तो उनका फूल-मालाओं से स्वागत किया गया, जिसे देखकर गांव के लोग भी भावुक हो उठे।

सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी ज्ञान प्रकाश अवस्थी के अनुसार, देवी दीन (60), मिश्रीलाल (65), वंश गोपाल (72), भुलाई (70), किरण (60), टीकाराम (69) और राममूर्ति (66) को प्राथमिक विद्यालय में प्रवेश दिया गया है। वहीं कालका (78) और राजदुलैया (75) को जूनियर हाई स्कूल में दाखिला मिला है।

स्कूली ड्रेस पहनकर पहुंचे इन बुजुर्गों ने बच्चों के साथ कक्षा में बैठकर पढ़ाई शुरू की। यह दृश्य पूरे गांव में चर्चा का विषय बन गया। आसपास के लोग भी इस अनोखी पहल को देखने स्कूल पहुंचने लगे। बुजुर्गों का यह उत्साह इस बात का प्रमाण है कि सीखने की लगन हो तो उम्र कभी बाधा नहीं बनती।

छानी गांव में यह कदम सामाजिक जागरूकता और बदलाव की मिसाल बन गया है। जहां एक ओर बच्चे अपने दादा-दादी की उम्र के लोगों के साथ पढ़ाई करते नजर आए, वहीं ग्रामीणों ने भी इस पहल की सराहना की। यह उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो किसी कारणवश शिक्षा से वंचित रह गए थे।

SDM रिंकू सिंह राही ने कहा कि अशिक्षित बुजुर्गों को शिक्षा से जोड़ना उनकी प्राथमिकता है। साथ ही उन्होंने प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और जनसहभागिता को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।



































