WASHINGTON NEWS. अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच कूटनीतिक हल की उम्मीद फिर जगी है। पाकिस्तान में हुई पहली वार्ता भले ही असफल रही हो, लेकिन अब दोनों देशों के बीच दूसरे दौर की बातचीत जल्द शुरू होने के संकेत मिल रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान समझौते के लिए उत्सुक है और उसने दोबारा बातचीत का संदेश भेजा है। वहीं उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी संकेत दिए हैं कि इस्लामाबाद में हुई वार्ता के दौरान कुछ प्रगति जरूर हुई थी।

मीडिया से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि ईरान पर अमेरिकी दबाव असर दिखा रहा है। उन्होंने कहा कि नाकेबंदी के चलते ईरान का कारोबार लगभग ठप है और वह समझौते के लिए तैयार नजर आ रहा है। ट्रंप ने साफ किया कि अमेरिका अपनी शर्तों से पीछे नहीं हटेगा और ईरान को परमाणु हथियार बनाने की अनुमति कभी नहीं दी जाएगी। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने एक इंटरव्यू में कहा कि बातचीत के दौरान ईरान ने परमाणु मुद्दे पर कुछ नरमी दिखाई है।

जेडी वेंस ने यह भी जोड़ा कि आगे बढ़ने के लिए ईरान को ही ठोस कदम उठाने होंगे। उन्होंने कहा कि अमेरिका इस प्रक्रिया को लंबा नहीं खींचना चाहता और जल्द एक व्यापक समझौते पर पहुंचना चाहता है। वहीं ईरान ने सीमित अवधि और नियंत्रित ढांचे में संवर्धन कम करने का प्रस्ताव दिया था। इसी मतभेद के चलते समझौता नहीं हो सका।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन दूसरे दौर की आमने-सामने बातचीत की तैयारी में जुट गया है। यह बैठक मौजूदा सीजफायर खत्म होने से पहले ही आयोजित की जा सकती है। संभावित स्थानों में जिनेवा और इस्लामाबाद का नाम सामने आया है। वहीं तुर्किए भी दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, दूसरा दौर 16 अप्रैल को ही आयोजित हो सकता है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

तारीख और स्थान को लेकर अंतिम फैसला कूटनीतिक प्रगति पर निर्भर करेगा। पहले दौर की वार्ता में सबसे बड़ा विवाद यूरेनियम संवर्धन को लेकर रहा। अमेरिका ने ईरान से 20 साल तक संवर्धन पूरी तरह बंद करने और अपने स्टॉक को देश से बाहर करने की मांग की थी। हालांकि अब संकेत मिल रहे हैं कि ईरान इस मुद्दे पर कुछ नरमी दिखाने को तैयार है, जिससे आगे की बातचीत का रास्ता खुल सकता है।

पहले दौर की विफलता के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की संभावनाएं खत्म नहीं हुई हैं। दोनों पक्षों के बयानों और कूटनीतिक हलचलों से साफ है कि आने वाले दिनों में यह वार्ता वैश्विक राजनीति की दिशा तय कर सकती है।




































