RAIPUR NEWS. नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में राज्य सरकार अब एक नई रणनीति पर काम कर रही है। सक्रिय नक्सलियों के आत्मसमर्पण और पुनर्वास के बाद अब साय सरकार जेलों में बंद माओवादियों को मुख्यधारा में लाने की योजना तैयार कर रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले दो वर्षों में 500 से अधिक माओवादी मारे गए हैं, जबकि करीब 3 हजार नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर पुनर्वास का रास्ता चुना। इसके अलावा लगभग 2 हजार नक्सलियों की गिरफ्तारी भी हुई है।

अब सरकार का फोकस उन कैद माओवादियों पर है, जो छोटे-छोटे मामलों में जेल में बंद हैं। सरकार ऐसे नक्सलियों के खिलाफ दर्ज मामलों की समीक्षा कर उन्हें वापस लेने और पुनर्वास देने की योजना बना रही है, ताकि वे सामान्य जीवन में लौट सकें। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि राज्य की पुनर्वास नीति केवल कागजी नहीं है, बल्कि इसे जमीन पर उतारा जा रहा है।

डिप्टी सीएम ने बताया कि बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों के जरिए भी समाज से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। सरकार का मानना है कि जब जंगलों से नक्सलियों का पुनर्वास संभव है, तो जेलों से भी यह प्रक्रिया सफल हो सकती है।

सरकार की योजना के तहत जेलों में बंद माओवादियों को पैरोल पर निकालकर पुनर्वास केंद्रों में लाया जाएगा। यहां पहले से सरेंडर कर चुके नक्सली उनसे मिलेंगे और उन्हें मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित करेंगे। इसके बाद सरकार उनके जमानत की प्रक्रिया में सहयोग करेगी, ताकि वे पुनर्वास केंद्रों में रहकर सामान्य जीवन जी सकें।

सरकार का मानना है कि पुनर्वास की इस पहल से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति स्थापित करने में मदद मिलेगी। यह योजना केवल सुरक्षा नहीं, बल्कि सामाजिक और मानसिक पुनर्स्थापना पर भी केंद्रित है।






































