RAIPUR NEWS. छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में पहुंचता नजर आ रहा है। सरकार का दावा है कि 31 मार्च 2026 तक सशस्त्र नक्सली कैडर का पूरी तरह खात्मा कर दिया जाएगा। कभी इस क्षेत्र में 500 से अधिक नक्सली सक्रिय थे, लेकिन अब इनकी संख्या घटकर करीब 40 रह गई है। इनमें भी बड़े कमांडर बहुत कम बचे हैं। बटालियन नंबर-1 का कमांडर सोढ़ी केसा और नॉर्थ डिविजन की सदस्य महिला नक्सली रूपी अभी भी सक्रिय बताए जा रहे हैं।

कौन है महिला नक्सली ‘रूपी’?
जानकारी के अनुसार, सोढ़ी केसा और रूपी अपने लगभग 40 साथियों के साथ उत्तर और दक्षिण बस्तर के अलग-अलग इलाकों में सक्रिय हैं। पहली बार इनकी तस्वीरें सामने आई हैं। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि ये बचे हुए नक्सली सरकार की तय समय सीमा को चुनौती देने की कोशिश कर सकते हैं। खासकर रूपी के बारे में कहा जा रहा है कि वह अपने पति की मौत का बदला लेने की भावना से संगठन में सक्रिय है।

बड़े ऑपरेशन पर फिलहाल रोक
31 मार्च 2026 को नक्सलवाद खत्म करने की समय सीमा तय की गई है, लेकिन अभी भी कुछ नक्सली पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। अधिकारियों का कहना है कि कई नक्सली आत्मसमर्पण करना चाहते हैं, इसलिए फिलहाल बड़े स्तर के अभियान नहीं चलाए जा रहे हैं। हालांकि, आने वाले 5 दिन बेहद अहम माने जा रहे हैं।

पुलिस की आखिरी चेतावनी
बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी. ने इन नक्सलियों को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा है कि तय समय सीमा तक आत्मसमर्पण नहीं करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, प्रदेश के गृहमंत्री विजय शर्मा ने भरोसा जताया है कि शेष नक्सली जल्द ही आत्मसमर्पण कर पुनर्वास का रास्ता चुनेंगे।

पापाराव के समर्पण से कमजोर हुआ नेतृत्व
इधर, पापा राव के आत्मसमर्पण के बाद दक्षिण-पश्चिम बस्तर में नक्सलियों का शीर्ष नेतृत्व लगभग खत्म हो चुका है। मोहला-मानपुर क्षेत्र में सक्रिय आखिरी पांच नक्सलियों ने भी सरेंडर कर दिया है। अब पुलिस बाकी बचे नक्सलियों से भी आत्मसमर्पण की अपील कर रही है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि शेष 40 नक्सली सरेंडर करते हैं या फिर कार्रवाई का सामना करते हैं।






































