JAIPUR. एक तरफ कांग्रेस भारत जोड़ो यात्रा निकाल रही है, तो वहीं कांग्रेस नेताओं की आपसी गुटबाजी में पार्टी बिखरती दिखाई दे रही है। ताज़ा सियासी संकट राजस्थान में उभरकर सामने आया है। अशोक गहलोत को कांग्रेस का अध्यक्ष बनाये जाने की संभावनाओं के बीच सीएम की कुर्सी को लेकर खींचतान शुरू हो गयी है। रात 11 बजे की खबर के अनुसार बढ़ते तनाव के बीच सोनिया गाँधी ने अशोक गहलोत और सचिन पायलट को दिल्ली बुला लिया है।

आज दोपहर करीब दो बजे राजस्थान में कांग्रेस का सियासी संकट शुरू हुआ। इस पूरे ड्रामे को समझने के लिए इसकी पृष्ठभूमि को समझना होगा। पूरा मामला राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत को कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की कवायद से शुरू हुआ। सूत्रों के अनुसार सोनिया गाँधी राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत को अध्यक्ष बनाना चाहती हैं। जबकि राहुल गाँधी के करीबी सचिन पायलट को राजस्थान का सीएम बनाने की तैयारी है। यहाँ यह बताना जरूरी है कि अशोक गहलोत सोनिया गाँधी के विश्वस्त माने जाते हैं।

चूँकि सीएम अशोक गहलोत और डिप्टी सीएम सचिन पायलट के बीच पहले से ही मनमुटाव है। ऐसे में अशोक गहलोत अव्वल तो सीएम की कुर्सी नहीं छोड़ना चाहते और अगर कुर्सी छूटती भी है तो सचिन पायलट को नहीं देना चाहते हैं। लेकिन जब हाईकमान का झुकाव सचिन की और दिखा तो अशोक गहलोत ने ताकत दिखते हुए सभी विधायकों को अपने आवास पर बुला लिया।
विधानसभा को इस्तीफ़ा देने पहुंचे कांग्रेसी
अशोक गहलोत गुट के विधायकों ने उस समय चौंका दिया जब 82 विधायक अपना इस्तीफ़ा लेकर विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी के आवास पर पहुंच गए। अशोक गहलोत गुट के विधायकों के अनुसार उनके सीएम गहलोत ही हैं और उन्हें किसी भी सूरत में पायलट सीएम के रूप में मंज़ूर नहीं हैं।
माकन और खड़गे पहुंचे जयपुर
गहलोत गट के विधायकों ने सामूहिक इस्तीफे की धमकी देकर कांग्रेस हाईकमान को चौंका दिया। अब मान-मनौव्वल का दौर जारी है। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता अजय माकन और मल्लिकार्जुन खड़गे जयपुर पहुंच गए हैं और दोनों गुटों को समझने की कोशिश जारी है। इस बीच यह भी चर्चा है कि इस खींचतान में अशोक गहलोत के साथ 90 से ज्यादा विधायक हैं, जबकि सचिन के साथ 10 विधायक भी नहीं है।





































