किसान नेताओं का कहना है कि पिछले वर्ष भी व्यापारियों ने जमकर कालाबाजारी की थी। यूरिया खाद, जिसकी सरकारी कीमत 266 रुपये थी, उसे किसानों को 2000 से 2500 रुपये तक में बेचा गया। आरोप लगाया गया कि इस वर्ष भी उसी तरह की साजिश रची जा रही है और किसानों को फिर से संकट में डालने की तैयारी है। Read More





























