TIRANDAJ DESK. भगवान राम के विषय में पूरी जानकारी हमें रामायण में मिलती है, लेकिन आप नहीं जानते होंगे कि राम भगवान के 3 भाई लक्ष्मण, भरत, शत्रुघन के अलावा एक बड़ी बहन भी थीं। हम आपको श्रीराम की बहन के बारे में बताएंगे।

दिवाली का त्योहार देशभर में इसलिए मनाया जाता है, क्योंकि इस दिन प्रभु श्रीराम माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ 14 वर्ष का वनवास काटकर अयोध्या नगरी वापस लौटे थे। तब से इसी ख़ुशी में दिवाली का पर्व मनाया जाता है।

श्रीराम जी के बारे में तमाम लोग जानते हैं लेकिन उनकी बहन का जिक्र नहीं मिलता। यहां तक कि वाल्मीकि रामायण में भी रामजी की बहन के बारे में नहीं लिखा गया है, लेकिन दक्षिण भारत की रामायण में उनकी बहन के विषय में सम्पूर्ण जानकारी दी गई है। आज हम आपको भगवान राम की बहन शांता के बारे में बताएंगे।

भगवान राम की बड़ी बहन थी शांता
दक्षिण भारत की रामायण के अनुसार शांता राजा दशरथ और माता कौशल्या की बड़ी बेटी थीं। शांता बचपन से ही सर्वगुण संपन्न थीं। उन्हें सभी वेदों का ज्ञान था तथा शिल्पकला में भी वह निपुण थीं। हालांकि राजा दशरथ ने बचपन में ही शांता को अंगदेश के राजा रोमपद और रानी वर्षिणी को गोद दे दिया था।

बचपन में ही शांता को गोद देने का यह था कारण
दरअसल रानी वर्षिणी, कौशल्या की बहन और शांता की मौसी थी। वर्षिणी अपने पति रोमपद जो कि अंगदेश के राजा थे। उनके साथ अयोध्या नगरी घूमने आए थे। रोमपद और वर्षिणी की कोई संतान नहीं थी। इसलिए वर्षिणी और रोमपद ने दशरथ और कौशल्या के सामने शांता को गोद लेने की इच्छा जताई। राजा दशरथ ने इसमें कोई आपत्ति नहीं जताई, तो वहीं माता कौशल्या अपनी बहन वर्षिणी को अपनी दहलीज से खाली हाथ नहीं लौटाना चाहती थीं, इसलिए माता कौशल्या ने भी शांता को गोद देने की बात पर हामी भर दी।

शांता बनी राजकुमारी
अंगदेश के राजा रोमपद और रानी वर्षिणी ने शांता को गोद ले लिया इसके बाद शांता अंगदेश की राजकुमारी बन गई।





































