CRUDE OIL PRICE: दुनियाभर के एनर्जी मार्केट में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष और अमेरिका के गल्फ कोस्ट की ओर बढ़ रहे चक्रवाती तूफान इसायस (Hurricane Isaias) ने कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में करीब 4% की तेजी दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड का भाव 4.08 डॉलर बढ़कर 104.28 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 91.49 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
कारोबार के दौरान दोनों बेंचमार्क की कीमतों में एक समय 5 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा की तेजी भी देखने को मिली। हालांकि, शुक्रवार सुबह अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की खबरों के बाद कीमतों में कुछ नरमी आई। ब्रेंट क्रूड करीब 103.5 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता नजर आया। बाजार में उतार-चढ़ाव की मुख्य वजह मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव और अमेरिका में तूफान के कारण तेल उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के पीछे दो बड़ी वजहें
क्रूड ऑयल की कीमतों में अचानक आई तेजी के पीछे दो प्रमुख कारण हैं। पहला, अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव बढ़ने की आशंका। दूसरा, तूफान इसायस के कारण अमेरिका के गल्फ ऑफ मेक्सिको क्षेत्र में तेल उत्पादन और रिफाइनरियों पर पड़ने वाला संभावित असर। मिडिल ईस्ट में जहाजों पर बढ़ते हमलों और होर्मुज स्ट्रेट से तेल की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है। वहीं, तूफान के खतरे को देखते हुए अमेरिकी ऊर्जा कंपनियों ने भी उत्पादन में कटौती और सुरक्षा उपाय शुरू किए हैं। इससे वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की उपलब्धता को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।
हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद बाजार को कुछ राहत मिली। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत चल रही है और 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव तक ईरान पर हमला नहीं किया जाएगा। दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि उनका देश होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने से जुड़े अमेरिकी प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है।
अमेरिका ने ईरान पर बढ़ाया आर्थिक दबाव
कूटनीतिक बातचीत के संकेतों के बावजूद अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव कम नहीं किया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरान के तेल कारोबार से जुड़े लोगों, नेटवर्क और 17 तेल टैंकरों को निशाना बनाते हुए नए प्रतिबंध लगाए हैं। इस बीच, सऊदी अरब के यानबू तेल टर्मिनल और उससे जुड़े ऊर्जा ढांचे की सुरक्षा को लेकर भी गतिविधियां तेज हुई हैं। फ्रांस और सऊदी अरब सुरक्षा उपायों की समीक्षा कर रहे हैं। क्षेत्रीय संघर्ष का दायरा बढ़ने की आशंका के बीच तेल उत्पादक देशों और अंतरराष्ट्रीय बाजार की नजरें पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।
होर्मुज स्ट्रेट पर दुनिया की नजर
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल परिवहन मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल खपत का करीब 20% हिस्सा इस मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में यहां जहाजों की आवाजाही बाधित होने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के दौरान इस समुद्री मार्ग के आसपास जहाजों पर हमलों और सुरक्षा संबंधी घटनाओं ने चिंता बढ़ाई है। यदि हालात और बिगड़ते हैं, तो तेल की ढुलाई महंगी हो सकती है और सप्लाई में देरी भी हो सकती है। इसका असर कच्चे तेल के साथ-साथ पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों पर भी पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने भी तेल भंडार जारी करने की प्रक्रिया तेज करने की बात कही है, ताकि बाजार में सप्लाई के दबाव को कम किया जा सके। हालांकि, इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि संघर्ष और समुद्री परिवहन में बाधाएं कितनी लंबी चलती हैं।
क्या भारत में महंगा हो सकता है पेट्रोल-डीजल?
कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी भारत के लिए चिंता का विषय बन सकती है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से भारत के आयात बिल, रुपये पर दबाव और महंगाई पर असर पड़ सकता है। हालांकि, क्रूड ऑयल के दाम बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें तुरंत बढ़ जाएंगी। घरेलू ईंधन की कीमतों पर कच्चे तेल के भाव के अलावा रुपये-डॉलर की विनिमय दर, टैक्स, तेल कंपनियों की लागत और सरकार की नीतियों का भी असर पड़ता है। यदि मिडिल ईस्ट में तनाव लंबे समय तक बना रहता है और तेल की सप्लाई बाधित होती है, तो भारत में परिवहन लागत और अन्य वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। फिलहाल बाजार की दिशा अमेरिका-ईरान वार्ता, होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही और तूफान इसायस के प्रभाव पर निर्भर करेगी।




































