RAIPUR NEWS. छत्तीसगढ़ के सरकारी मेडिकल कॉलेजों और उनसे जुड़े अस्पतालों में इलाज की व्यवस्था पर जूनियर डॉक्टरों के आंदोलन का असर पड़ सकता है। लंबित मांगों पर सरकार की ओर से ठोस निर्णय नहीं होने का आरोप लगाते हुए जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) ने 25 सितंबर से OPD सेवाओं के बहिष्कार का ऐलान किया है। संगठन ने आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की बात कही है। JDA के मुताबिक, OPD बहिष्कार के दौरान मरीजों को इलाज से पूरी तरह वंचित नहीं किया जाएगा।

इसके लिए समानांतर OPD चलाकर वैकल्पिक चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराने की बात कही गई है। हालांकि, सरकारी अस्पतालों में नियमित OPD व्यवस्था पर इसका असर पड़ने की संभावना है। डॉक्टरों के संगठन ने सरकार को अगले चरण के आंदोलन की चेतावनी भी दी है। JDA के अनुसार, यदि उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो 28 सितंबर से PG रेजिडेंट्स, MBBS इंटर्न्स, बॉन्डेड मेडिकल ऑफिसर्स और सीनियर रेजिडेंट्स इमरजेंसी सेवाओं से भी हटने के प्रस्तावित चरण में शामिल होंगे।

ऐसी स्थिति में सरकारी मेडिकल कॉलेजों से जुड़े अस्पतालों की आपातकालीन सेवाओं पर दबाव बढ़ सकता है। फिलहाल डॉक्टरों की ओर से 25 सितंबर से OPD बहिष्कार की घोषणा की गई है, जबकि 28 सितंबर से इमरजेंसी सेवाओं को लेकर चेतावनी दी गई है।

मरीजों के लिए क्या बदलेगा?
OPD बहिष्कार शुरू होने के बाद सरकारी अस्पतालों में नियमित ओपीडी व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। JDA ने समानांतर OPD के जरिए मरीजों को चिकित्सकीय सलाह उपलब्ध कराने की बात कही है। वहीं, 28 सितंबर से आंदोलन के अगले चरण की स्थिति बनने पर इमरजेंसी सेवाओं को लेकर भी मरीजों और अस्पताल प्रबंधन के सामने चुनौती बढ़ सकती है।






































