BILASPUR NEWS. मोबाइल की टूटी स्क्रीन बदलवाने के लिए ग्राहक ने 3 हजार रुपये दिए, लेकिन दुकान से निकलने के कुछ ही घंटे बाद नई स्क्रीन ने जवाब दे दिया। ‘ओरिजिनल जैसी क्वालिटी’ और तीन साल चलने की गारंटी का दावा करने वाले दुकानदार के खिलाफ अब जिला उपभोक्ता आयोग ने फैसला सुनाया है। आयोग ने इसे सेवा में कमी मानते हुए दुकानदार को पूरी रकम 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने के अलावा हर्जाना और वाद व्यय का भुगतान करने का आदेश दिया है।

टूटी स्क्रीन बदलवाने पहुंची थी दुकान
कोनी निवासी ईशा रानी के सैमसंग गैलेक्सी मोबाइल की स्क्रीन गिरने से टूट गई थी। इसके बाद 29 जनवरी 2026 को वह पुराने बस स्टैंड स्थित राजीव प्लाजा में ‘दीपक मोबाइल’ दुकान पहुंचीं। आरोप है कि दुकान संचालक ने 3 हजार रुपये में OLED डिस्प्ले लगाने की बात कही और उसे ओरिजिनल जैसी गुणवत्ता वाला बताते हुए कम से कम तीन साल तक चलने का भरोसा दिलाया।

दुकान से निकलते ही शुरू हुई परेशानी
डिस्प्ले लगवाने के बाद ग्राहक को ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ा। महज 1 से 2 घंटे के भीतर मोबाइल की स्क्रीन ब्लैक आउट होने लगी और झिलमिलाने लगी। ईशा रानी ने खराब स्क्रीन का वीडियो बनाकर दुकानदार को भेजा और दोबारा दुकान पहुंचीं। आरोप है कि इसके बाद दुकानदार ने रकम वापस करने के बजाय टालमटोल शुरू कर दी।

व्हाट्सऐप चैट ने खोली पूरी पोल
मामला उपभोक्ता आयोग तक पहुंचा तो व्हाट्सऐप चैट, भुगतान की स्लिप और खराब स्क्रीन के फोटो-वीडियो अहम सबूत बने। चैट से यह सामने आया कि डिस्प्ले बदलने के करीब तीन घंटे के भीतर ही ग्राहक ने दुकानदार को स्क्रीन खराब होने की सूचना दे दी थी।
आयोग ने माना- यह ‘सेवा में कमी’
मामले की सुनवाई आयोग के अध्यक्ष आनंद कुमार सिंघल, सदस्य पूर्णिमा सिंह और आलोक कुमार पाण्डेय की पीठ ने की। आयोग ने माना कि ग्राहक से पूरी राशि लेने के बाद खराब या डुप्लीकेट डिस्प्ले लगाना और शिकायत सामने आने के बाद भी उचित समाधान नहीं करना सेवा में कमी की श्रेणी में आता है।

45 दिन में करना होगा भुगतान
जिला उपभोक्ता आयोग ने दुकानदार को ग्राहक की ली गई पूरी रकम 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है। इसके साथ ही हर्जाना और वाद व्यय की राशि भी अदा करनी होगी। आयोग ने आदेश के पालन के लिए 45 दिनों की समय-सीमा तय की है।





































