NEW DELHI. अगर आपकी गाड़ी का इंश्योरेंस खत्म हो चुका है तो आने वाले समय में परेशानी बढ़ सकती है। बिना वैध बीमा के चलने वाली गाड़ियों पर लगाम लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सख्त कदम उठाने का सुझाव दिया है। कोर्ट ने कहा है कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे बिना इंश्योरेंस वाली गाड़ियों को पेट्रोल पंप पर ईंधन देने से रोका जा सके।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने यह भी सुझाव दिया कि सड़कों और हाईवे पर लगे कैमरों की मदद से बिना बीमा वाली गाड़ियों की पहचान कर सीधे ई-चालान भेजा जाए। कोर्ट ने देश में बड़ी संख्या में बिना इंश्योरेंस चल रहे वाहनों पर चिंता जताई है।

पेट्रोल पंप से जुड़ सकता है इंश्योरेंस डेटा
सुप्रीम कोर्ट ने इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (IRDAI) और सड़क परिवहन मंत्रालय को एक पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने को कहा है। इसके तहत वाहनों के इंश्योरेंस स्टेटस को पेट्रोल पंप सिस्टम से जोड़ा जा सकता है।

अगर वाहन का बीमा वैध नहीं होगा, तो पेट्रोल पंप पर ईंधन देने से इनकार करने की व्यवस्था बनाई जा सकती है। इस कदम का उद्देश्य लोगों को समय पर वाहन बीमा कराने के लिए प्रेरित करना है।

कैमरों से कट सकता है ऑटोमैटिक चालान
अदालत ने पुलिस और ट्रैफिक विभाग को ऐसे डिजिटल सिस्टम के इस्तेमाल पर जोर दिया है, जो वाहन पोर्टल और इंश्योरेंस डेटा से जुड़े हों। हाईवे पर लगे ANPR कैमरों की मदद से बिना बीमा वाली गाड़ियों की पहचान कर ई-चालान भेजा जा सकता है।

बिना इंश्योरेंस गाड़ी चलाना है अपराध
मोटर वाहन अधिनियम की धारा 146 के तहत बिना थर्ड पार्टी इंश्योरेंस के वाहन चलाना कानूनन अपराध है। पहली बार पकड़े जाने पर 2 हजार रुपये तक का जुर्माना या 3 महीने तक की जेल या दोनों का प्रावधान है। वहीं दोबारा गलती करने पर 4 हजार रुपये तक जुर्माना और जेल की सजा हो सकती है।
ऐसे में वाहन चालकों के लिए जरूरी है कि वे अपनी गाड़ी का इंश्योरेंस समय पर अपडेट रखें, ताकि चालान और कानूनी कार्रवाई से बचा जा सके।





































