TEHRAN NEWS. पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका/इजरायल के बीच बढ़ते युद्ध के बादलों ने स्थानीय बाजार की कमर तोड़ दी है। वैश्विक स्तर पर गैस सप्लाई चेन प्रभावित होने की खबरों के बीच शहर में कमर्शियल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति पर अघोषित रोक लग गई है। इस स्थिति का फायदा उठाकर गैस एजेंसियों के हॉकर और बिचौलिये घरेलू सिलेंडरों की जमकर कालाबाजारी कर रहे हैं।

छोटे सिलेंडर (3 किलो गैस) की कीमत अब ₹500 के पार
सबसे बुरा हाल उन गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों का है, जो छोटे सिलेंडरों पर निर्भर हैं। स्थानीय दुकानदारों ने मनमाने ढंग से दाम बढ़ा दिए हैं। रविवार तक 3 किलो गैस के लिए 400 रुपये लिए जा रहे थे, जबकि सोमवार को 450 रुपये वसूले गए। अब मंगलवार से उसी 3 किलो गैस के लिए 500 रुपये मांगे जा रहे हैं। महज 24 घंटे के भीतर प्रति सिलेंडर 100 रुपये की भारी बढ़ोतरी कर दी गई है।

हॉकरों की चांदी, ग्राहकों की जेब खाली
लोधी पारा निवासी प्रकाश ओझा बताते हैं कि गैस एजेंसियों के हॉकर घरेलू कोटे के सिलेंडरों को होटलों और ढाबों में ऊंचे दामों पर सप्लाई कर रहे हैं। इससे आम उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। वहीं, छोटे सिलेंडर भरने वाले दुकानदारों ने “स्टॉक खत्म” होने का डर दिखाकर लूट मचा रखी है।

दुकानदारों का तर्क है कि उन्हें गैस महंगी मिल रही है, लेकिन हकीकत यह है कि पुराने स्टॉक को ही नए दामों पर बेचकर चांदी काटी जा रही है।
प्रकाश का कहना है कि दुकानदार अवैध तरीके से छोटे सिलेंडर भर रहे हैं, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
युद्ध की स्थिति अंतरराष्ट्रीय है, लेकिन स्थानीय स्तर पर कालाबाजारी को रोकना प्रशासन की जिम्मेदारी है। फिलहाल खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की ओर से इन मनमानी कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया है, जिसका सीधा फायदा मुनाफाखोर उठा रहे हैं।



































