MUNGELI NEWS. किसानों की गाढ़ी कमाई और उनकी जीवनभर की मेहनत जब खराब बीजों की भेंट चढ़ जाती है, तो उनके पास सिवाय निराशा के कुछ नहीं बचता। लेकिन जब मीडिया और प्रशासन मिलकर काम करें, तो न्याय की उम्मीद बंधती है। मुंगेली जिले के ग्राम मोतीपुर में खराब धान बीज के कारण फसल बर्बादी के मामले को ‘तीरंदाज न्यूज़’ ने प्रमुखता से उठाया था। इस खबर का अब बड़ा असर हुआ है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कृषि विभाग हरकत में आ गया है और बीज विक्रेता एजेंसी तथा संबंधित कंपनी को नोटिस जारी कर दिया है।

खेतों में पहुंची कृषि विभाग की टीम, 30 प्रतिशत तक ‘करगा’ की पुष्टि
ग्राम मोतीपुर निवासी किसान प्रेमचंद बघेल और संदीप बघेल ने आरोप लगाया था कि उनके द्वारा खरीदे गए धान के बीज खराब गुणवत्ता के थे, जिसके कारण उनकी फसल में जंगली धान (करगा) उग आया। तीरंदाज न्यूज़ द्वारा इस मुद्दे को उठाए जाने के बाद कृषि विभाग की एक विशेष टीम ने मौके पर पहुंचकर खेतों का निरीक्षण किया। विभागीय जांच में किसानों की शिकायत सच साबित हुई। टीम ने पाया कि खेतों में लगभग 25 से 30 प्रतिशत फसल में करगा उग आया है। इस खुलासे के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि किसानों को दिए गए बीज के बैच में भारी गड़बड़ी थी।

पंजाब एजेंसी और चमक कंपनी को 7 दिन का अल्टीमेटम
खेतों में भारी मात्रा में करगा पाए जाने के बाद कृषि विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। विभाग ने बीज प्रदाता ‘पंजाब एजेंसी (मुंगेली)’ और बीज का निर्माण करने वाली ‘चमक कंपनी’ को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। दोनों को अपना पक्ष रखने के लिए सात दिन का समय दिया गया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि एजेंसी और कंपनी इस भारी लापरवाही पर क्या स्पष्टीकरण देते हैं और कृषि विभाग उनके जवाब के बाद क्या दंडात्मक कार्रवाई करता है।

1.70 लाख रुपये का नुकसान, सीएम हेल्पलाइन में भी शिकायत
इस पूरे प्रकरण में किसान प्रेमचंद बघेल को भारी आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ा है। उनकी दो एकड़ में लगी धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है, जिससे उन्हें लगभग 1 लाख 70 हजार रुपये का नुकसान हुआ है। न्याय की गुहार लगाते हुए किसान ने जिला प्रशासन के साथ-साथ मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (1076) में भी अपनी शिकायत दर्ज कराई है (शिकायत क्रमांक- CC261000236033)।
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मुआवजे पर टिकी हैं किसानों की उम्मीदें
प्रशासन द्वारा नोटिस जारी करना कार्रवाई की दिशा में एक सकारात्मक कदम है, लेकिन किसानों के लिए यह अंतिम न्याय नहीं है। पीड़ित किसानों का स्पष्ट कहना है कि मामला केवल नोटिस जारी करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। बीज की गुणवत्ता और बैच की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। साथ ही, राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीम द्वारा वास्तविक नुकसान का आकलन कर किसानों को नियम के अनुसार तत्काल क्षतिपूर्ति (मुआवजा) दिलाई जानी चाहिए।
तीरंदाज न्यूज़ की मुहिम रहेगी जारी
किसानों के हकों की लड़ाई में तीरंदाज न्यूज़ पूरी जिम्मेदारी के साथ खड़ा है। हमारा सवाल अभी भी कायम है—यदि बीज की गुणवत्ता में गड़बड़ी साबित होती है, तो किसानों के नुकसान की भरपाई कौन करेगा? क्या किसान प्रेमचंद बघेल और संदीप बघेल को उनकी बर्बाद फसल का उचित मुआवजा मिलेगा? जब तक पीड़ित किसानों को न्याय और राहत नहीं मिल जाती, तीरंदाज न्यूज़ इस मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा और हर अपडेट जनता के सामने लाता रहेगा।






































