MUNGELI NEWS. छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में किसानों की उम्मीदों पर खराब गुणवत्ता वाले बीजों ने पानी फेर दिया है। ग्राम मोतीमपुर के निवासी किसान प्रेमचंद बघेल ने मुंगेली स्थित पंजाब एजेंसी से खरीदे गए धान बीज पर गंभीर आरोप लगाए हैं। किसान का दावा है कि बीज की खराब गुणवत्ता के चलते उनकी 2 एकड़ कृषि भूमि में लगी लगभग 75 से 80 प्रतिशत फसल सामान्य धान के बजाय ‘करगा’ (जंगली धान) में तब्दील हो गई है।

इस लापरवाही ने किसान के परिवार की आजीविका पर बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। जिस खेत से उन्हें 70 क्विंटल धान की उपज की उम्मीद थी, वहां अब बमुश्किल 20 क्विंटल उत्पादन होने की संभावना है। 50 क्विंटल धान के नुकसान से करीब ₹1,55,000 की चपत लगी है, जबकि खराब फसल की कटाई और सफाई में ₹15,000 का अतिरिक्त मजदूरी खर्च जुड़ने से कुल आर्थिक क्षति ₹1,70,000 तक पहुंच गई है।

मामले में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि पंजाब एजेंसी द्वारा बीज खरीदी का कोई विधिवत ‘पक्का बिल’ नहीं दिया गया। किसान को महज एक सादे कागज की पर्ची थमा दी गई, जो बीज विक्रय नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाता है।

शिकायतकर्ता के अनुसार, 22 अक्टूबर 2026 को एजेंसी संचालक ने स्वयं खेत पहुंचकर फसल का निरीक्षण किया और मौके पर मौजूद गवाहों के सामने बीज की खराबी को स्वीकारा भी। इसके बाद किसान ने न्याय के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (1076) का दरवाजा खटखटाया और शिकायत क्रमांक CC261000236033 दर्ज कराई। शिकायत के बाद 24 अक्टूबर 2026 को ग्राम सेवक और विभागीय अधिकारियों की टीम ने खेत का भौतिक सत्यापन किया।
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किसान प्रेमचंद बघेल ने जिला कलेक्टर एवं एसडीएम मुंगेली के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर पूरे मामले की वैज्ञानिक व निष्पक्ष जांच और ₹1.70 लाख की क्षतिपूर्ति की मांग की है। अब यह कृषि विभाग और स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वे मामले में केवल कागजी खानापूर्ति न करें, बल्कि दोषी विक्रेता के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई कर पीड़ित किसान को उसका हक दिलाएं। सवाल यही है कि क्या इस अन्नदाता को अपनी बर्बाद फसल का उचित मुआवजा मिलेगा, या उसे व्यवस्था के हाल पर छोड़ दिया जाएगा?







































