DURG NEWS. आज के डिजिटल और तेजी से बदलते परिवेश में बच्चों को उनके अधिकारों और सुरक्षा के प्रति जागरूक करना बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA), दुर्ग ने एक अनूठी पहल की है। ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ के तहत दुर्ग, पाटन, भिलाई-3 और धमधा के स्कूलों में बच्चों को नीरस व्याख्यानों के बजाय नुक्कड़ नाटक और चित्रकला जैसी रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से उनके कानूनी अधिकार और साइबर सुरक्षा के गुर सिखाए जा रहे हैं।

राष्ट्रीय एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार चल रहे इस अभियान का मार्गदर्शन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री के. विनोद कुजूर और समन्वय सचिव श्री उमेश कुमार भागवतकर कर रहे हैं। इन जागरूकता शिविरों में न्यायाधीश, साइबर सेल के अधिकारी, लॉ यूनिवर्सिटी के प्राध्यापक और पैरा लीगल वॉलंटियर्स (PLV) सीधे बच्चों से संवाद कर रहे हैं।

छह प्रमुख विषयों पर फोकस
इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए छह विशेष थीम तय की गई हैं— ‘मेरा बचपन, मेरा अधिकार’, ‘कानून जानो, बचपन बचाओ’, ‘सुरक्षित क्लिक, सुरक्षित बचपन’, ‘बोलो, बताओ, बचाओ’, ‘ना बाल विवाह, ना बाल शोषण’ और ‘जागरूक बचपन, सशक्त भारत’। इनके जरिए बच्चों को गुड टच-बैड टच की पहचान, सुरक्षित इंटरनेट के उपयोग, बाल विवाह रोकने के कानून और किसी भी अनुचित व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाने और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया समझाई जा रही है।

नुक्कड़ नाटक और रंगों से दी गई सीख
अभियान के तहत स्वामी आत्मानंद शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला, मर्रा में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यहाँ मैट्स यूनिवर्सिटी, रायपुर के विधि विद्यार्थियों ने डॉ. आई. नागमणी देशलहरे के नेतृत्व में एक शानदार नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। इस नाटक के जरिए बच्चों को खेल-खेल में असुरक्षित परिस्थितियों को पहचानने और उनसे बचने के तरीके बताए गए। वहीं, जिले के अन्य स्कूलों में ड्राइंग प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, जहां बच्चों ने कैनवस पर रंगों के माध्यम से बाल संरक्षण और अपने अधिकारों को लेकर अपनी रचनात्मक सोच उकेरी।
चुप्पी तोड़ें, खुलकर बोलें
इस अभियान का मूल संदेश यह है कि बच्चे किसी भी डर या संकोच के बिना अपनी बात माता-पिता, शिक्षकों या सक्षम अधिकारियों के सामने रखें। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का मानना है कि बच्चों की सुरक्षा केवल परिवार या स्कूल की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। इस पहल से बच्चों में वह आत्मविश्वास जगाने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे वे अपने लिए एक सुरक्षित और भयमुक्त वातावरण का निर्माण कर सकें।







































