NEW DELHI NEWS. भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली ने संत प्रेमानंद महाराज के आश्रम जाने के बदले 5 करोड़ रुपए लेने के आरोपों को खारिज कर दिया है। विराट कोहली के प्रवक्ता ने बुधवार को जारी बयान में इन आरोपों को झूठा, निराधार और तथ्यहीन बताया। उन्होंने कहा कि विराट कोहली संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन के लिए केवल गहरी श्रद्धा और सम्मान की वजह से आश्रम जाते हैं। प्रवक्ता ने मीडिया से अपील की कि किसी भी दावे या आरोप को प्रसारित करने से पहले उसके तथ्यों की जांच की जाए। दरअसल, श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष फलाहारी महाराज दिनेश शर्मा ने सोमवार को दावा किया था कि विराट कोहली और उनकी पत्नी अनुष्का शर्मा को केलीकुंज आश्रम बुलाने के लिए 5 करोड़ रुपए दिए गए थे।

फलाहारी महाराज ने संत प्रेमानंद महाराज को लिखी चिट्ठी में आरोप लगाया था कि उनकी टीम से जुड़े एक साधु गुट ने विराट कोहली को 5 करोड़ रुपए देकर दर्शन के लिए बुलाया, ताकि प्रेमानंद महाराज को सेलिब्रिटी के तौर पर प्रचारित किया जा सके। फलाहारी महाराज ने अपने पत्र में संत प्रेमानंद महाराज की टीम को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि टीम में साधु के भेष में भू-माफिया शामिल हैं, जो यमुना के डूब क्षेत्र की जमीनों की बिक्री और बच्चों की किडनी चोरी जैसे अपराधों में शामिल हैं।

उन्होंने संत प्रेमानंद महाराज से गोवर्धन आने और पूरे मामले की CBI जांच कराने की मांग की। साथ ही उन्होंने दावा किया कि महाराज वहां सुरक्षित नहीं हैं और सरकार को उन्हें Z+ सुरक्षा देनी चाहिए। हालांकि, इन आरोपों के संबंध में स्वतंत्र पुष्टि का कोई तथ्य सामने नहीं आया है। वहीं विराट कोहली के प्रवक्ता ने 5 करोड़ रुपए लेकर आश्रम जाने के दावे को स्पष्ट रूप से खारिज किया है।

गुरु पूर्णिमा से पहले आश्रम पहुंचे थे विराट-अनुष्का
विराट कोहली और अनुष्का शर्मा संत प्रेमानंद महाराज से कई बार मुलाकात कर चुके हैं। दोनों आखिरी बार गुरु पूर्णिमा से पहले 22 जुलाई को नए आश्रम यमुना विहार कुंज पहुंचे थे। इस दौरान दोनों चेहरे पर मास्क लगाए हुए थे और नंगे पांव आश्रम में दाखिल हुए थे। बारिश के कारण रास्ते में कीचड़ था। वीडियो में विराट कोहली अनुष्का शर्मा का हाथ थामकर कीचड़ भरे रास्ते से आश्रम की ओर जाते नजर आए थे। दोनों की संत प्रेमानंद महाराज से अब तक कई मुलाकातें चर्चा में रही हैं। विराट की ओर से अब साफ किया गया है कि इन मुलाकातों के पीछे किसी तरह का आर्थिक लेन-देन नहीं, बल्कि संत के प्रति उनकी श्रद्धा और सम्मान है।





































