NEW DELHI NEWS. चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर बुधवार को नया विवाद सामने आया है। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में आयोग के फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कीं। इन आपत्तियों में मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने, फॉर्म-6 में बदलाव और चुनावी IT सिस्टम के संचालन से जुड़े मुद्दे शामिल बताए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं को “अनधिकृत” और “अवैध” बताते हुए सवाल उठाए। खास तौर पर फॉर्म-6 में SIR से जुड़े सवाल जोड़ने को लेकर दोनों आयुक्तों ने आपत्ति दर्ज की थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, विवेक जोशी ने मई में कहा था कि कानून के तहत निर्धारित फॉर्म-6 और फॉर्म-8 में बदलाव के लिए संबंधित नियमों में संशोधन जरूरी है। 19 मई को सुखबीर सिंह संधू ने भी इस राय से सहमति जताई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, नए मतदाताओं के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में SIR से संबंधित एक घोषणा जोड़ी गई थी। इसमें आवेदक से पूछा गया था कि क्या उसका, उसके माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछली SIR के दौरान तैयार मतदाता सूची में था। दोनों चुनाव आयुक्तों का कहना था कि यह बदलाव वैधानिक प्रक्रिया के तहत होना चाहिए। संधू ने बाद में भी इस बदलाव को हटाने और मूल फॉर्म बहाल करने की बात कही।

इंडियन एक्सप्रेस की दूसरी रिपोर्ट के अनुसार, संधू और जोशी ने चुनावी IT सिस्टम में केंद्रीकृत नियंत्रण को लेकर भी चिंता जताई। दोनों ने कहा कि मतदाता सूची तैयार करने और उसमें बदलाव करने वाले राज्य स्तर के अधिकारियों की वैधानिक भूमिका IT सिस्टम के जरिए सीमित नहीं होनी चाहिए। इस मुद्दे पर दोनों आयुक्तों ने कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन को भी अलग-अलग पत्र लिखे थे। रिपोर्ट सामने आने के बाद चुनाव आयोग के सूत्रों ने इन दावों के बीच कहा कि SIR समेत आयोग के सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के बाद ही फैसले लिए गए हैं।

चुनाव आयोग तीन सदस्यीय संवैधानिक संस्था है, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्त होते हैं। हालांकि, इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज की गई अलग-अलग आपत्तियों का हवाला दिया गया है। रिपोर्ट के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने SIR प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि रिपोर्ट से आयोग के भीतर की स्थिति को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी निशाना साधा।

आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि चुनाव आयोग को कोई अकेला व्यक्ति नहीं चला सकता। उन्होंने दिल्ली और हरियाणा के चुनावों को रद्द करने की मांग भी उठाई। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इस मुद्दे पर सरकार और संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कानून, संविधान और नियमों को दरकिनार करना चाहती है। हालांकि, विपक्ष के इन आरोपों के समानांतर चुनाव आयोग के सूत्रों का कहना है कि आयोग के फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। ऐसे में अब विवाद का केंद्र यह है कि दोनों चुनाव आयुक्तों की लिखित आपत्तियों और आयोग के फैसलों के बीच वास्तविक प्रक्रियागत स्थिति क्या थी।





































