NEW DELHI. केंद्र सरकार देश में स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। पेट्रोल में एथेनॉल ब्लेंडिंग के बाद अब सरकार CNG और PNG में बायोगैस मिलाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए ‘गोबरधन’ योजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिल चुकी है। सरकार का मानना है कि इस योजना से बायोगैस का उत्पादन बढ़ेगा, आयातित ईंधन पर निर्भरता घटेगी और भविष्य में आम लोगों को सस्ती कुकिंग गैस का विकल्प मिल सकेगा।

23,731 करोड़ रुपये की योजना
सरकार ने इस योजना के लिए करीब 23,731 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसे अगले 10 वर्षों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसकी जानकारी दी।

योजना के तहत गोबर, कृषि अवशेष, जैविक कचरा और अन्य बायोमास से बायोगैस तैयार की जाएगी, जिसे बाद में CNG और PNG के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जाएगा।

तीन चरणों में होगी बायोगैस ब्लेंडिंग
सरकार ने बायोगैस ब्लेंडिंग का लक्ष्य भी तय किया है।
- 2026-27: 3% बायोगैस ब्लेंडिंग
- 2027-28: 4% बायोगैस ब्लेंडिंग
- 2028-29 से: 5% बायोगैस ब्लेंडिंग
इस व्यवस्था के तहत गैस वितरण कंपनियां बायोगैस उत्पादकों से गैस खरीदेंगी और उसे अपने नेटवर्क के जरिए उपभोक्ताओं तक पहुंचाएंगी।

बायोगैस उत्पादन को 10 गुना बढ़ाने का लक्ष्य
सरकार का उद्देश्य देश में बायोगैस उत्पादन को मौजूदा स्तर से लगभग 10 गुना तक बढ़ाना है। इससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर मिलेगा और जैविक कचरे का बेहतर उपयोग हो सकेगा।
योजना के तहत देशभर में 600 से 700 नए बायोगैस प्लांट स्थापित करने की तैयारी है। सरकार का मानना है कि इससे इस क्षेत्र में निजी निवेश भी बढ़ेगा।
क्या खत्म हो जाएंगे गैस सिलेंडर?
सरकार ने फिलहाल एलपीजी सिलेंडर को पूरी तरह बंद करने जैसी कोई घोषणा नहीं की है। हालांकि, बायोगैस का उत्पादन और पाइपलाइन नेटवर्क बढ़ने के साथ भविष्य में कुछ क्षेत्रों में लोगों को रसोई गैस के वैकल्पिक और अपेक्षाकृत सस्ते विकल्प मिल सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सबसे बड़ा फायदा उन इलाकों को होगा, जहां पाइप्ड गैस की सुविधा उपलब्ध है या भविष्य में पहुंचने वाली है।
किसानों और पर्यावरण दोनों को होगा फायदा
गोबरधन योजना से गोबर और कृषि अवशेष जैसी सामग्री का बेहतर उपयोग होगा। इससे खेतों में पराली जलाने जैसी समस्याओं में कमी आ सकती है, जैविक खाद का उत्पादन बढ़ेगा और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा। सरकार को उम्मीद है कि यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण, दोनों के लिए लाभदायक साबित होगी।





































