AYODHYA NEWS. अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की पूजा व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। राम मंदिर में आज से रामलला की सेवा में लगे सभी अर्चकों और आचार्यों के लिए निर्धारित ड्रेस कोड लागू कर दिया गया है। धार्मिक समिति ने अर्चकों की वेशभूषा को लेकर यह व्यवस्था तय की है, जिसका उद्देश्य पूजा व्यवस्था में एकरूपता और अनुशासन को और मजबूत करना है।

धार्मिक समिति के सदस्य राजकुमार दास ने ड्रेस कोड की जानकारी देते हुए बताया कि रामलला की सेवा में लगे सभी अर्चक अब निर्धारित वेशभूषा में ही पूजा-अर्चना करेंगे। नए ड्रेस कोड के तहत अर्चकों के लिए पीत वस्त्र निर्धारित किए गए हैं।

गर्मी में धोती और उत्तरीय होगा पहनावा
गर्मी के मौसम में अर्चक नीचे धोती और ऊपर उत्तरीय वस्त्र धारण करेंगे। खास बात यह है कि ये वस्त्र सिले हुए नहीं होंगे, बल्कि बिना सिले हुए रेशमी सिल्क के होंगे। धार्मिक समिति के अनुसार, पूजा की शुचिता को ध्यान में रखते हुए रेशमी वस्त्र को उपयुक्त माना गया है। समिति का मानना है कि बिना सिले हुए रेशमी वस्त्र धार्मिक सेवा की परंपरा और शुचिता के अनुरूप हैं। साथ ही, स्पर्श-अस्पर्श की स्थिति में इनके अशुद्ध होने की संभावना भी कम मानी जाती है।

ऋतु के अनुसार बदलेंगे वस्त्र
ड्रेस कोड केवल गर्मी के मौसम तक सीमित नहीं रहेगा। शरद ऋतु और ठंड के मौसम में अर्चकों के लिए मौसम के अनुसार गर्म कपड़ों की व्यवस्था की जाएगी। इस दौरान ऊनी वस्त्रों का इस्तेमाल होगा, लेकिन वस्त्रों का रंग पीत ही रखा जाएगा। धार्मिक समिति ने स्पष्ट किया है कि मौसम के अनुसार अर्चकों के कपड़ों में बदलाव किया जाएगा, लेकिन उनकी वेशभूषा में एकरूपता बनी रहेगी। यानी ऋतु बदलने के साथ वस्त्रों का प्रकार बदल सकता है, लेकिन रंग और निर्धारित ड्रेस कोड की मूल व्यवस्था कायम रहेगी।

पूजा व्यवस्था में बढ़ेगा अनुशासन
राजकुमार दास के मुताबिक, आज से रामलला की सेवा में लगे सभी आचार्य और अर्चक निर्धारित ड्रेस कोड में ही नजर आएंगे। माना जा रहा है कि इस व्यवस्था से मंदिर की पूजा पद्धति में एकरूपता आएगी और सेवा व्यवस्था अधिक व्यवस्थित एवं अनुशासित होगी।





































