विजयनगरम। आंध्र प्रदेश के विजयनगरम जिले से मानवता और समर्पण की मिसाल पेश करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक आदिवासी आश्रम स्कूल की वार्डन ने बीमार छात्रा को करीब छह किलोमीटर तक अपनी पीठ पर उठाकर अस्पताल पहुंचाया, जिससे समय पर इलाज मिलने से उसकी जान बच गई। इस घटना ने आदिवासी क्षेत्रों में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को भी उजागर किया है।

जानकारी के अनुसार, गुम्मलक्ष्मीपुरम मंडल के वडापुट्टी गांव की रहने वाली भुवनेश्वरी आदिवासी कल्याण बालिका आश्रम विद्यालय में कक्षा सातवीं की छात्रा है। हाल ही में छुट्टियों के दौरान घर आने पर उसे तेज बुखार हो गया। पहले उसका इलाज कुरुपम सरकारी अस्पताल में कराया गया, लेकिन कुछ दिनों बाद उसकी तबीयत फिर बिगड़ गई। इसके बाद परिजनों ने स्कूल प्रशासन को इसकी सूचना दी।

छात्रा की गंभीर स्थिति की जानकारी मिलते ही जनजातीय कल्याण विभाग की अधिकारी ने आश्रम स्कूल की वार्डन हेमा को तत्काल गांव पहुंचकर छात्रा को अस्पताल ले जाने के निर्देश दिए। वार्डन जब गांव पहुंचीं तो उन्होंने देखा कि छात्रा की हालत बेहद नाजुक है और इलाज में देरी खतरनाक साबित हो सकती है।

गांव तक सड़क नहीं होने के कारण कोई वाहन वहां नहीं पहुंच सकता था। ऐसे में वार्डन हेमा ने छात्रा को अपनी पीठ पर बांधा और पहाड़ी रास्तों तथा पगडंडियों से करीब छह किलोमीटर पैदल चलकर नेल्लिकेक्कुवा गांव पहुंचीं। वहां से वाहन की व्यवस्था कर छात्रा को पार्वतीपुरम सरकारी अस्पताल पहुंचाया गया।

अस्पताल में डॉक्टरों ने छात्रा का तत्काल इलाज शुरू किया। चिकित्सकों के अनुसार, समय पर अस्पताल पहुंचने के कारण उसकी जान बच गई और फिलहाल उसकी हालत स्थिर है।

घटना के बाद स्थानीय लोगों ने वार्डन हेमा के साहस और समर्पण की सराहना की है। वहीं ग्रामीणों ने सरकार से आदिवासी क्षेत्रों में सड़क, एम्बुलेंस और स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी भी मरीज को इलाज के लिए ऐसी कठिन परिस्थितियों का सामना न करना पड़े।





































