LUCKNOW FIRE TRAGEDY: लखनऊ। राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड में 15 छात्रों की मौत के बाद कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। प्रारंभिक जांच और उपलब्ध दस्तावेजों से संकेत मिले हैं कि भवन से जुड़े अनधिकृत निर्माण और प्रशासनिक स्तर पर हुई कथित लापरवाही ने इस हादसे की पृष्ठभूमि तैयार की। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एसआईटी जांच के आदेश दिए हैं।

22 जून को अलीगंज के सेक्टर-डी स्थित एक बहुमंजिला भवन में आग लगने से 15 युवाओं की मौत हो गई थी। भवन में विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही थीं। हादसे के बाद सरकार ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।

1980 में आवंटित हुआ था भवन
जानकारी के अनुसार, सेक्टर-डी स्थित भवन संख्या एमएस/102/डी वर्ष 1980 में लॉटरी प्रणाली के माध्यम से आवंटित किया गया था। बाद में यह संपत्ति कई बार हस्तांतरित हुई और वर्ष 2014 में वर्तमान स्वामियों के नाम दर्ज की गई। इसी वर्ष भवन का नक्शा आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत किया गया था।

2016 में जारी हुआ था ध्वस्तीकरण आदेश
भवन के हस्तांतरण के बाद अनधिकृत निर्माण की शिकायतें सामने आईं। इसके बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने वर्ष 2016 में मामला दर्ज कर जांच की थी। जांच के बाद 10 मई 2016 को अवैध निर्माण के खिलाफ ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया, लेकिन करीब दो महीने बाद यह आदेश निरस्त कर दिया गया। आदेश निरस्त किए जाने के कारणों को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं।

शिकायतों के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई
सूत्रों के मुताबिक, भवन में लंबे समय से व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही थीं और समय-समय पर इसकी शिकायतें भी संबंधित विभागों तक पहुंचती रहीं। कई बार जांच और कार्रवाई के आदेश दिए गए, लेकिन कथित तौर पर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। अब यह पहलू भी जांच के दायरे में है कि शिकायतों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

2014 से 2026 तक तैनात अधिकारियों की होगी जांच
एलडीए की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वर्ष 2014 से 2026 के बीच इस क्षेत्र में कई अधिकारी, अभियंता और जोनल स्तर के जिम्मेदार अधिकारी तैनात रहे हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि भवन से संबंधित मामलों में किस स्तर पर लापरवाही हुई और कौन-कौन अधिकारी इसके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।
एसआईटी करेगी पूरे मामले की जांच
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (SIT) पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच करेगा। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।





































